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Don’t Travel on Memorial Day Weekend. Try New Restaurants Instead.

Food New York TimesBy BY NIKITA RICHARDSON Via NYT To WORLD NEWS

Friday, December 31, 2021

कोविड-19 की जांच के लिए 24 घंटे चलने वाले बूथ स्थापित करें, केंद्र ने राज्यों को दी सलाह

नयी दिल्लीदेश में कोविड-19 के मामलों में लगातार हो रही वृद्धि के मद्देनजर केंद्र ने सभी राज्यों तथा केंद्र शासित प्रदेशों की सरकारों को विभिन्न स्थानों पर कोविड-19 की जांच के लिए 24 घंटे चलने वाले बूथ स्थापित करने की सलाह दी है। केंद्र ने राज्यों से कहा है कि इन बूथों पर 24 घंटे कोविड की रैपिड एंटीजन जांच की सुविधा उपलब्ध कराई जाए तथा स्वास्थ्यकर्मियों को लक्षणों वाले मरीजों के लिए देश में ही निर्मित जांच किट का उपायोग करने के लिए प्रेरित करें। लक्षण होने पर तुरंत जांच हो राज्यों के मुख्य सचिवों को भेजे एक पत्र में केंद्रीय स्वास्थ्य सचिव राजेश भूषण और भारतीय चिकित्सा एवं अनुसंधान परिषद (आईसीएमआर) के महानिदेशक डॉ बलराम भार्गव ने कहा कि किसी भी व्यक्ति को बुखार, खांसी, सिरदर्द, गले में खराश, सांस फूलना, शरीर में दर्द, स्वाद या गंध का चले जाना, थकान और दस्त लगने की तकलीफ हो तो उसे कोविड-19 के संदिग्ध मरीज के रूप में देखा जाना चाहिए। लक्षण होने पर तुरंत जांच करवानी चाहिए- ICMR केंद्रीय स्वास्थ्य सचिव और आईसीएमआर के महानिदेशक ने पत्र में कहा, ‘ऐसे सभी व्यक्तियों की जांच की जानी चाहिए। जांच की रिपोर्ट आने तक ऐसे लोगों को तुरंत खुद को अलग कर लेने और स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय के घर में पृथकवास संबंधी दिशा-निर्देशों का पालन करने की सलाह दी जानी चाहिए।’ दोनों ही अधिकारियों ने पत्र में कहा कि आरटीपीसीआर जांच में पांच से आठ घंटे लगने के कारण नैदानिक पुष्टि में देर होती है इसलिए ‘ आपको उस विशेष परिस्थति में तीव्र एंटीजेन जांच का व्यापक उपयोग कर जांच बढ़ाने को प्रोतसाहित किया जाता है जहां आरटीपीसी जांच से चुनौतियां पैदा होती हैं।

''राजस्थान बना बलात्कारियों का अड्डा" बोले बीजेपी नेता मदन दिलावर , बूंदी महिला थाना एसएचओ शौकत अली पर भी बरसे


कोटा, अर्जुन अरविंद
राजस्थान प्रदेश बलात्कारियों का अड्डा बन गया है। प्रदेश में बहन- बेटियां सुरक्षित नहीं है। कांग्रेस की गहलोत सरकार में अपराधियों को संरक्षण दिया जा रहा है। बहन-बेटियां घर, स्कूल यहां तक कि पुलिस थानों में भी सुरक्षित नहीं है। पुलिसकर्मी महिलाओं को थाने ले जाते हैं। परिवार के लोगों को थाने ले जाते हैं। उनके साथ गलत व्यवहार किया जाता है। धमकाया जाता है। बयान बदले जाते हैं। 161 के बयान करवाए जाते हैं। इस तरह के हालात प्रदेश में हो रहे हैं। दिलावर ने शुक्रवार को वीडियो बयान जारी कर प्रदेश में महिला अत्याचार के मुद्दे को लेकर कांग्रेस सरकार को जमकर आड़े हाथ लिया।


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People with Omicron are less likely to need hospitalization, U.K. report finds.


World New York TimesBy BY MARC SANTORA AND ADEEL HASSAN Via NYT To WORLD NEWS

The Adventures Of Dalma Hills - Road Documentary || ReloadeD DevilS ||


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कुमार विश्वास का CM गहलोत पर हास्य बाण, इनसे दुनिया सलाह लेती है, इन्हें सलाहाकार की क्या जरूरत


शरद टांक,सिरोही
राजस्थान के माउंट आबू में कवि कुमार विश्वास से कई हास्य व्यंग चले। यहां शरद महोत्सव में तहत कवि सम्मलेन का आयोजन पॉलो ग्राउंड में अरावली रंगमंच हुआ। इसमें प्रसिद्ध कवि डॉ कुमार विश्वास ने काव्य पाठ किया । इस दौरान कार्यक्रम में मुख्यमंत्री के सलाहकार और सिरोही विधायक संयम लोढ़ा मौजूद थे। कुमार विश्वास ने व्यंग कसते हुए कहा मुख्यमंत्री की स्थिति ऐसी बीच बीच ने सबको चेक करना पडता है अपना है या नहीं । संयम लोढ़ा को इसीलिए थोड़ी सलाहकार बनाया के ,वो उनसे सलाह लेंगे । उनको सलाह की क़्या जरूरत वो दुनिया को सलाह देते है । वो सिर्फ इसलिए बनाया की बीच बीच में उन्हें चेक करते रहे।


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Earthy Mushrooms, Bold Peppers


Food New York TimesBy BY KRYSTEN CHAMBROT Via NYT To WORLD NEWS

Thursday, December 30, 2021

पति पत्नी के विवाद में बच्चे को दिक्कत नहीं होनी चाहिए, सुप्रीम कोर्ट ने हर महीने 50 हजार रुपये देने का दिया निर्देश

नई दिल्ली वैवाहिक रिश्तों में कटुता पैदा होने से बच्चों पर पड़ने वाले दुष्प्रभाव से चिंतित सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि माता पिता के बीच विवाद के कारण बच्चे को कठिनाईं नहीं होना चाहिये। इसके साथ ही शीर्ष अदालत ने सेना के एक अधिकारी को उसके 13 साल के बेटे के वयस्क होने तक उसकी देखभाल और भरण-पोषण करने का निर्देश दिया । सैन्य अधिकारी का विवाह विच्छेद करते हुये जस्टिस एम आर शाह और न्यायमूर्ति ए एस बोपन्ना की पीठ ने अधिकारी को अपनी पत्नी को 50 हजार रुपये बतौर भरण-पोषण भत्ता देने का भी निर्देश दिया । 2011 से साथ में नहीं रह रहे थे पति-पत्नी शीर्ष अदालत ने कहा कि इस तथ्य को ध्यान में रखते हुए कि पति और पत्नी दोनों मई 2011 से साथ में नहीं रह रहे हैं , इसलिए, यह कहा जा सकता है कि उनके बीच विवाह टूट चुका है जिसमें सुधार नहीं हो सकता है। पीठ ने कहा, ‘‘यह भी बताया गया है कि पति ने पहले ही दूसरी शादी कर ली है । शीर्ष अदालत ने कहा कि मामले के तथ्यों और परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए और संविधान के अनुच्छेद 142 के तहत शक्तियों का प्रयोग करके परिवार अदालत द्वारा पारित डिक्री में हस्तक्षेप करने की आवश्यकता नहीं है। दायित्व और जिम्मेदारी से मुक्त नहीं किया जा सकता पीठ ने कहा, ‘‘हालांकि, साथ ही, पति को बेटे को वयस्क होने तक उसके दायित्व और जिम्मेदारी से मुक्त नहीं किया जा सकता है। पति-पत्नी के बीच चाहे जो भी विवाद हो, संतान को इससे कठिनाईं नहीं होना चााहिये ।’’ पीठ ने कहा, ‘‘बच्चे:बेटे के वयस्क होने तक उसका दायित्व उसके पिता की जिम्मेदारी है ।’’ शीर्ष अदालत ने कहा कि (इस मामले में) मां कुछ भी नहीं कमा रही है और इसलिए, बेटे की शिक्षा आदि सहित उसके भरण-पोषण के लिए उचित/पर्याप्त राशि की आवश्यकता है, जिसका भुगतान पति को करना होगा। हर महीने 50 हजार रुपये पत्नी को देने का आदेश अदालत ने कहा, ‘‘उपरोक्त बातों को ध्यान में रखते हुए और ऊपर बताए गए कारणों के लिए, अपीलकर्ता-पत्नी और पति के बीच विवाह के विघटन के डिक्री की पुष्टि करके वर्तमान अपील का निपटारा किया जाता है।’’ पीठ ने अपने हालिया फैसले में कहा, ‘‘इसलिये पति को दिसंबर 2019 से बेटे के भरण पोषण के लिये हर महीने 50 हजार रुपये पत्नी को देने का आदेश दिया जाता है ।’’ दोनों का विवाह 16 नवंबर 2005 को हुआ था । पत्नी ने सैन्य अधिकारियों के समक्ष पति के खिलाफ कई शिकायत दर्ज करायी थी जिसमें विवाहेत्तर संबंध की शिकायत भी है । सेना के अधिकारियों ने उस अधिकारी के खिलाफ एक जांच शुरू की थी जिसमें उन्हें दोषमुक्त करार दिया गया था ।