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Don’t Travel on Memorial Day Weekend. Try New Restaurants Instead.

Food New York TimesBy BY NIKITA RICHARDSON Via NYT To WORLD NEWS

Sunday, April 11, 2021

ब्लॉगः नक्सली मुठभेड़ की जगह पहुंचा तो सिहरन-सी हुई

जम्मू के रहने वाले और कोबरा कमांडो राकेश्वर सिंह को पिछले दिनों माओवादियों ने एक मुठभेड़ के बाद बंधक बना लिया था। उनको छुड़ाने गई 11 सदस्यीय मध्यस्थता समिति में एक सदस्य बस्तर के गांधी कहे जाने वाले पद्मश्री धर्मपाल सैनी भी थे, जो पिछले लगभग पचास सालों से गांधीवादी तरीके से बस्तर में शिक्षा के लिए काम कर रहे हैं। लंबी बातचीत में उन्होंने हमें बताया कि राकेश्वर की रिहाई कैसे संभव हुई।

Seohar Latest News : गेहूं की फसल को लील गई आग, देखिए शिवहर का ये वीडियो


गौतम कुमार, शिवहर: जिले मथुरापुर कहतरवा पंचायत के कहतरवा और धोबाही के बीच चौर में आगलगी की घटना में गेहूं की फसल जलकर राख हो गई। आगलगी की घटना रविवार की रात 9 बजकर 30 मिनट की बताई जा रही है। प्त जानकारी के अनुसार कहतरवा निवासी फूल बाबू साह के खेत में आगलगी की घटना हुई है। यहां 3 बीघे की सफल कटाई कर गेहूं की फसल को थ्रेसिंग के लिए रखा गया था। आग लगने की कारणों का अभी तक पता नहीं चल पाया है। आग की लपटें इतनी भयानक थी कि आस-पास के गांव धोबाही, कहतरवा, बसाहिया पवित्र नगर के ग्रामीण जुट गए और फसल को बचाने में लग गए। ग्रामीणों ने अग्निशमन विभाग को इसकी सूचना दी जिसके बाद मौके पर फायर ब्रिगेड की गाड़ियों ने पहुंच कर आग पर काबू पाया।


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Chhapra Latest News : छपरा में पिकअप वैन देखते ही देखते हो गई स्वाहा, देखिए आग से कैसे हुई तबाही


छपरा: जिले के मसरख में एक पिकअप वैन में आग लग गई और देखते ही देखते वो जलकर खाक हो गई। ये हादसा रविवार को हुआ जिसकी लाइव तस्वीरें कैमरे में कैद हो गईं। दरअसल इस पिकअप वैन में गेहूं की फसल काटकर ले जाई जा रही थी। इसी बीच वैन में ही शॉट सर्किट होने के बाद आग लग गई। पिकअप वैन धु धु कर जलने लगी। मशरक थाना क्षेत्र के चाॅद कुदरिया गांव में रविवार की दोपहर खेत से गेहूं का बोझा लेकर गांव जा रहे पिकअप भान में बिजली के शार्ट सर्किट से आग लग गयी जिससे पिकअप भान में आग लग गई। देखते ही देखते आग ने विकराल रूप धारण कर लिया।बताया जा रहा है कि खेत से गेहूं का बोझा लेकर गांव की तरफ जा रहा था कि पिक अप पर लदे बोझे में बधे बास में बिजली का तार सट गया।


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Last Call: ‘Shameless’ Showrunner Says Goodbye to the Gallaghers


Arts New York TimesBy BY JENNIFER VINEYARD Via NYT To WORLD NEWS

जीरो बैलेंस अकाउंट पर भी इस तरह से वसूली कर रहे हैं बैंक

नई दिल्ली देश में चाहे सरकारी बैंक (PSU Bank) हो या निजी बैंक (Private Bank), वे सेवा शुल्क (Service Charge) वसूलने में पीछे नहीं हैं। वह गरीब लोगों के जीरो बैलेंस अकाउंट (Zero Balance Account) से भी कुछ सेवाओं के लिए अत्यधिक शुल्क की वसूली कर रहे हैंं। यह खुलासा आईआईटी-बंबई (IIT Bombay) के एक स्टडी (Study of ) से हुआ है। इसमें बताया गया है कि देश का सबसे बड़ा बैंक, एसबीआई (State Bank of India) भी गरीबों से अनुचित शुल्कों की वसूली कर रहा है। एसबीआई भी इस वसूली में शामिल आईआईटी-मुंबई की स्टडी में कहा गया है कि एसबीआई () ने बेसिक सेविंग बैंक डिपोजिट अकाउंट (BSBDA) के खाताधारकों पर चार के बाद प्रत्येक निकासी लेनदेन पर 17.70 रुपये का शुल्क लगाने का फैसला किया है। इसे उचित नहीं माना जा सकता है। रिपोर्ट में कहा गया है कि वर्ष 2015-20 के दौरान एसबीआई ने 12 करोड़ बीएसबीडी खाताधारकों पर सेवा शुल्क लगाकर 300 करोड़ रुपये से अधिक जुटाए हैं। देश के दूसरे सबसे बड़े सरकारी बैंक () के बीएसबीडी खातों की संख्या 3.9 करोड़ है। बैंक ने इस अवधि में इन खाताधारकों से इस शुल्क के रूप में 9.9 करोड़ रुपये जुटाए हैं। नियमों का हो रहा है उल्लंघन रिपोर्ट में कहा गया है कि बीएसबीडी अकाउंट पर कुछ बैंकों द्वारा रिजर्व बैंक के नियमनों का प्रणालीगत उल्लंघन किया जा रहा है। इनमें एसबीआई का नाम सबसे पहले आता है। एसबीआई द्वारा एक महीने चार निकासी लेनदेन के बाद प्रत्येक लेनदेन पर 17.70 रुपये वसूले जा रहे हैं। यहां तक कि डिजिटल निकासी में भी एसबीआई यह वसूली कर रहा है। इस शुल्क से 2019-20 में जुटाया 158 करोड़ आईआईटी-बंबई के प्रोफेसर आशीष दास ने कहा, ‘‘इस सेवा शुल्क के जरिये एसबीआई ने करीब 12 करोड़ बीएसबीडी खाताधारकों से 300 करोड़ रुपये जुटाए हैं। इसमें से 2018-19 में ही अकेले 72 करोड़ रुपये जुटाए गए। इसके बाद 2019-20 में 158 करोड़ रुपये जुटाए गए। उल्लेखनीय है कि बीएसबीडी अकाउंट पर शुल्क रिजर्व बैंक के सितंबर, 2013 के दिशा निर्देश के आधार पर लगाया जा रहा है। इसमें कहा गया है कि इन खाताधारकों को एक महीने में चार से अधिक बार निकासी का अधिकार होगा। यह बैंक के विवेक के आधार पर होगा, बशर्ते बैंक उसके लिए शुल्क की वसूली नहीं करे। क्या कहना है रिजर्व बैंक का रिजर्व बैंक (RBI) के दिशा निर्देश में बीएसबीडी अकाउंट के पहलुओं को भी परिभाषित किया गया है। इसमें कहा गया है कि नियामकीय आवश्यकताओं के अनुरूप यह स्पष्ट किया जाता है कि जब तक कि बचत जमा खाता बीएसबीडीए है, बैंक उसपर कोई सेवा शुल्क या फिर बैंक द्वारा विवेकाधीन आधार पर दी जा रही मूल्यवर्धित सेवाओं के लिए कोई शुल्क नहीं लगाया जा सकता। इसमें कहा गया है कि रिजर्व बैक एक महीने में चार से अधिक निकासी को मूल्यवर्धित सेवा मानता है।

कोरोना के 'सुपर स्प्रेडर' बन रहे युवा, 18 से 45 साल के लिए भी शुरू हो वैक्सीनेशनः एक्सपर्ट्स

नई दिल्ली दिल्ली में कोरोना के मामले बढ़ते जा रहे हैं। लेकिन इस बार कोरोना की चाल व रफ्तार अलग है। इस बार युवाओं और कम उम्र के लोगों में भी संक्रमण हो रहा है। मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल का भी कहना है कि दिल्ली में इन दिनों आ रहे कोरोना के नए मरीजों में कुल मरीजों में से 65 पर्सेंट की उम्र 45 साल से नीचे की है। एक्सपर्ट का भी कहना है कि इस बार कम उम्र के लोगों में यह संक्रमण ज्यादा हो रहा है, इसलिए अब समय आ गया है कि इस उम्र के लोगों का भी वैक्सीनेशन शुरू किया जाए। म्यूटेशन की वजह से फैल रहा है संक्रमणकोविड एक्सपर्ट डॉक्टर अंशुमान कुमार ने बताया कि अभी संक्रमण में तेजी की सबसे बड़ी वजह वायरस में म्यूटेशन है। अभी दिल्ली में डबल म्यूटेशन, साउथ अफ्रीकन म्यूटेशन और यूके म्यूटेशन फैला हुआ है। अभी तक की स्टडी में यह साबित हो रहा है कि पहले वाले वायरस की तुलना में यह म्यूटेड वायरस ज्यादा तेजी से फैल रहा है। हालांकि, इसमें पहले की तरह कैजुअल्टी (मौतें) नहीं है। सुपर स्प्रेडर बन रहे हैं युवा डॉक्टर ने कहा कि 18 से 45 साल के बीच के युवा व लोग सबसे ज्यादा एक्टिव होते हैं और अभी भी हैं। ये लोग काम कर रहे हैं, ऑफिस जा रहे हैं। शॉपिंग से लेकर रेस्टोरेंट और मूवी से लेकर पार्टियां कर रहे हैं। अभी तक इन्हें लगता था कि कोरोना संक्रमण तो उनके लिए है ही नहीं, क्योंकि 80 पर्सेंट बुजुर्ग व बीमार को यह वायरस परेशान कर रहा था। इन्हें तो संक्रमण होता था, लेकिन पता तक नहीं चलता था। इसलिए, बेखौफ अभी भी ये लोग घूम रहे हैं। लेकिन, इस बार ऐसा नहीं है, इस बार इस उम्र के लोगों में भी रिस्क है और अपनी लापरवाही से ये सुपर स्प्रेडर भी बने हुए हैं। खासकर युवा में यह दिक्कत ज्यादा आ रही है। बुजुर्गों में डर व वैक्सीनेशन उन्हें बचा रहा है डॉक्टर ने बताया कि बुजुर्गों में इस बीमारी का सबसे ज्यादा खतरा था। इसलिए बुजुर्ग सबसे ज्यादा एहतियात बरत रहे हैं। जैसे ही वैक्सीन आई, उन्होंने खुल कर वैक्सीनेशन कराया और डर की वजह से वो सभी जरूरी गाइडलाइन का फॉलो अभी भी कर रहे हैं। जहां एक तरफ उन्हें वैक्सीन से प्रोटेक्शन मिल रहा है, वहीं दूसरी तरफ वो खुद सख्ती से नियमों का पालन कर रहे हैं। यही वजह है कि वो इस बार कम संक्रमित हो रहे हैं। वैक्सीनेशन सभी के लिए शुरू कर देनी चाहिए डॉक्टर अंशुमान का कहना है कि जो अभी स्थिति है उसके अनुसार तो वैक्सीनेशन सभी के लिए शुरू कर देनी चाहिए, यानी 18 से 45 साल के लोगों के लिए भी अब वैक्सीनेशन होना चाहिए। दिल्ली मेडिकल काउंसिल के प्रेसिडेंट डॉक्टर अरुण गुप्ता का भी कहना है कि अब समय आ गया है कि केंद्र सरकार को सभी के लिए वैक्सीनेशन शुरू कर देनी चाहिए। डॉक्टर ने कहा कि 135 करोड़ की आबादी में .8 फीसद का ही वैक्सीनेशन हुआ है। अगर इस रफ्तार से वैक्सीनेशन हुआ तो कब तक हम हर्ड इम्यूनिटी के स्तर पर पहुंच सकेंगे।

तिब्बत में 300 अरब मेगावाट बिजली के लिए विशाल बांध बनाएगा चीन, भारत की बढ़ी टेंशन

पेइचिंग चीन तिब्बत में एक विशाल बांध बनाने की योजना बना रहा है। यह चीन की यांग्सी नदी पर बने तीन बांधों से ज्यादा बड़ा होगा और चीन में खपत के लिए जरूरी बिजली से तीन गुना ज्यादा बिजली पैदा करेगा। इसकी वजह से पर्यावरणविदों के साथ-साथ भारत में चिंता देखी जा रही है। इससे चीन ब्रह्मपुत्र नदी के पानी को हिमालय के इलाकों और भारत में बहने से पहले नियंत्रित करने की कोशिश करेगा। यह परियोजना तिब्बत के मेडोग काउंटी में शुरू होगी और मध्य चीन में यांग्सी नदी पर बने थ्री जॉर्ज बांध से भी कई गुना बड़ी होगी। इसकी क्षमता हर साल 300 अरब किलोवाट बिजली का उत्पादन करने की होगी। इसका जिक्र चीन की रणनीतिक 14वीं पंचवर्षीय योजना में किया गया है, जिसे मार्च में जारी किया गया। हालांकि, इसमें विस्तार से जानकारी नहीं दी गई है। इसमें परियोजना की समयसीमा या फिर बजट के बारे में नहीं बताया गया है। चीन जिस नदी पर बांध बनाने की योजना बना रहा है, उसे तिब्बत में कहा जाता है। इस पर दो परियोजनाओं का काम शुरू होना है, जबकि छह अभी विचाराधीन हैं। पर्यावरणविद कर सकते हैं विरोध बता दें कि यालुंग जांग्बो नदी तिब्बत से बहते हुए ब्रह्मपुत्र बनकर भारत में प्रवेश करती है। पिछले साल तिब्बत की स्थानीय सरकार ने चीन की सरकारी कंपनी 'पावर चाइना' के साथ 'रणनीतिक सहयोग समझौता' किया था। इसके महाने भर बाद कंपनी के प्रमुख ने चीनी कम्युनिस्ट पार्टी के यूथ विंग के सामने आंशिक तौर पर परियोजना की रूपरेखा रखी थी। चीन जीवाश्म ईंधन के लिए विकल्प के तौर पर इस परियोजना को सही ठहरा सकता है, लेकिन उसे पर्यावरणविदों के कड़े विरोध का सामना करना पड़ सकता है। जैसा कि 1994 और 2012 के बीच बने थ्री जॉर्ज बांध की वजह से करीब 14 लाख लोगों को विस्थापित होना पड़ा था। अमेरिकी थिंकटैंक ब्रायन आइलर का कहना है, 'इतने विशाल बांध को बनाना कई वजहों से बुरा विचार है।' यह इलाका भूकंप की गतिविधियों के अलावा जैव विविधता वाला भी है। भारत के धर्मशाला में स्थित निर्वासित तिब्बती सरकार के थिंक टैंक का कहना है कि इसके पर्यावरण और राजनीतिक दोनों लिहाज से जोखिम हैं। कई लोगों को पलायन करना होगा। वहीं, भारत भी इस परियोजना को लेकर चिंतित है।