Featured Post

Don’t Travel on Memorial Day Weekend. Try New Restaurants Instead.

Food New York TimesBy BY NIKITA RICHARDSON Via NYT To WORLD NEWS

Saturday, April 10, 2021

देश में OBC कितने? नीतीश-अखिलेश बेचैन, पर जनगणना में यह राज नहीं खोलेगी सरकार

नई दिल्ली लंबे वक्त से उठ रही अन्य पिछड़े वर्ग (ओबीसी) की आबादी की गिनती की मांग जल्द पूरी होती नहीं दिख रही है। सूत्रों की मानें तो इस साल की जनगणना में भी ओबीसी जातियों की आबादी की गिनती की उम्मीद लगभग खत्म हो गई है। सूत्रों का कहना है कि इस संबंध में पहले ही फैसला ले लिया गया था और निकट भविष्य में सरकार की ओर से फैसले में बदलाव की कोई उम्मीद नहीं दिख रही है। सपा, आरजेडी, एनसीपी जैसी विपक्षी पार्टियां तो पिछले कुछ वक्त से की मांग कर ही रहीं हैं, सत्ताधारी बीजेपी के बड़ी सहयोगी जेडीयू भी इसके पक्ष में है। केंद्र ने की मांग को ठुकराया हाल ही में राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग आयोग ने केंद्र को चिट्ठी लिखकर एसएसी-एसटी और अल्पसंख्यकों की तर्ज पर जातीय जनगणना की मांग की थी। केंद्र से ओबीसी जनगणना की मांग पिछले महीने हुई राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग आयोग की बैठक के बाद की गई है। इस बैठक में राष्ट्रीय स्तर पर ओबीसी समाज से आने वाले लोगों की गिनती की मांग वाली सुप्रीम कोर्ट की याचिका पर चर्चा हुई। बैठक में पैनल ने फैसला किया कि सरकार को सुप्रीम कोर्ट में ओबीसी जनगणना से जुड़ी याचिका का समर्थन करना चाहिए, इसके बाद आयोग की ओर से समाजिक न्याय मंत्रालय को पत्र लिखा गया। सूत्र बता रहे हैं कि संभव है कि आयोग ने सीधे देश में जनगणना की जिम्मेदारी संभालने वाले 'रजिस्ट्रार जनरल ऑफ इंडिया' को चिट्ठी लिखी हो। आखिरी बार साल 1931 में हुई थी ऐसी जनगणना अगर कोरोना महामारी की वजह से पिछले साल चीजें प्रभावित नहीं होतीं तो अब तक हाउस लिस्टिंग का काम पूरा हो गया होता। हालांकि जनगणना की प्रक्रिया में देरी ने ओबीसी गणना का मांग करने वालों को थोड़ा और वक्त दे दिया है। गौरतलब है कि ओबीसी समाज की संख्या पता लगाने के लिए आखिरी बार ऐसी जनगणना 1931 में हुई थी, लेकिन साल 2018 में तत्कालीन गृह मंत्री राजनाथ सिंह ने 2021 में ओबीसी जनगणना की बात कही थी। हालांकि मोदी सरकार को दूसरा कार्यकाल शुरू होने के बाद से केंद्र इस जनगणना को लेकर पलट गया। विपक्षी पार्टियां लंबे वक्त से कर रहीं जाति आधारित जनगणना की मांग आपको बता दें कि विपक्षी पार्टियां जैसे आरजेडी अध्यक्ष लालू प्रसाद यादव, अखिलेश यादव समेत बीजेपी के कई नेता भी ओबीसी जनगणना की मांग पिथले कुछ वक्त से कर रहे हैं। लालू प्रसाद यादव अकसर और पीएम नरेंद्र मोदी पर जानबूझकर जाति आधारित जनगणना रोकने का आरोप लगाते रहते हैं। सपा नेता अखिलेश यादव भी लगातार जाति आधारित जनगणना की मांग करते रहें हैं। महाराष्ट्र में शिवसेना, एनसीपी और कांग्रेस वाली महाविकास अघाड़ी सरकार ने भी केंद्र से जातिगत जनगणना की मांग की है, पिछे साल विधानसभा में इससे संबंधित प्रस्ताव भी पारित किया जा चुका है। बीजेपी के 'अपने' भी कर चुके हैं मांग ऐसा नहीं है कि केवल विपक्षी पार्टियां ही जाति ओबीसी जातियों की जनसंख्या पता करने की मांग कर रही हैं, बीजेपी की सहयोगी जेडीयू के नेता और बिहार के सीएम नीतीश कुमार ने भी हाल ही में जाति आधारित की जनगणना की मांग उठाई थी। नीतीश का तर्क है कि जातियों की जनसंख्या का सही आंकड़ा पता चलने पर सरकार को उसी अनुसार योजनाएं बनाने में मदद मिलेगी। बीजेपी के कुछ नेता भी ओबीसी जनगणना की मांग कर चुके हैं, पिछले साल सांसद गणेश सिंह ने लोकसभा में ओबीसी जनगणना की मांग की थी। आखिर क्यों जाति आधारित जनगणना पर जोर दे रहा है विपक्ष जेडीयू, आरजेडी, समाजवादी पार्टी जैसी क्षेत्रीय पार्टियों की जोरशोर से जाति आधारित जनगणना की मांग की वजह समझने के लिए आपको इन पार्टियो की राजनीति को समझना होगा। चाहे नीतीश हो, लालू हों या अखिलेश ये सभी नेता पिछड़े समाज से आते हैं और पिछड़ी जातियों की राजनीति करते हैं। इन पार्टियों का मानना है कि देश में ओबीसी की आबादी 50 फीसदी से ज्यादा है, जबकि इस वर्ग को इस हिसाब से शिक्षा, रोजगार और अन्य संसाधानों में हिस्सेदारी नहीं मिली है। इसलिए जाति आधारित जनगणना कराई जानी चाहिए, जिससे कि आबादी के अनुपात में सबको प्रतिनिधित्व मिल सके।

यूपी में कोरोना बेकाबू, मिले 9695 केस, लखनऊ में फिर टूटा रेकॉर्ड, UP की टॉप-5 खबरें


यूपी में कोरोना वायरस का संक्रमण बेकाबू हो गया है। शुक्रवार को प्रदेश में कोरोना संक्रमण के कुल 9 हजार 6 सौ 95 नए मामले सामने आए। वहीं महामारी के चलते 37 लोगों की मौत हो गई। राजधानी लखनऊ में कोरोना के नए मामलों का आंकड़ा तीन हजार के करीब पहुंच गया। लखनऊ में रेकॉर्ड 2 हजार 9 सौ 34 नए मामले सामने आए। वहीं, प्रयागराज में 1 हजार 16, वाराणसी में 845, कानपुर नगर में 522 और नोएडा में 225 मरीज मिले।


via WORLD NEWS

Coronavirus Reality check : क्या 'कोरोना सीरियल ब्लास्ट' का है इंतजार? देख लीजिए आरा स्टेशन का रियलिटी चेक


चंदन कुमार, भोजपुर
बिहार में अचानक से कोरोना वायरस के मामले बढ़ोतरी आ गई है। शुक्रवार को सूबे में इस महामारी के 2174 नए पॉजिटिव केस सामने आए। इसी के साथ कोरोना के मामले एक झटके में 10 हजार के पार पहुंच गए। कोरोना संकट के बीच कई राज्यों में बढ़ती सख्ती के मद्देनजर अब प्रवासी लोग बिहार लौट रहे हैं। निर्देश के मुताबिक, इन यात्रियों का रेलवे स्टेशन पर टेस्ट जरूरी है लेकिन आरा रेलवे स्टेशन का हाल देखकर सवाल खड़े होने लगे हैं।

एनबीटी की टीम शनिवार सुबह 6 बजे आरा रेलवे स्टेशन पर मौजूद थी। इस दौरान बड़ी संख्या में यात्री ट्रेन से यहां उतरे। तय नियम के मुताबिक, इनकी जांच स्टेशन पर होनी चाहिए। लेकिन जैसा कि आप देख रहे हैं रेलवे स्टेशन पर याद करने के लिए जांच केंद्र बनाया गया है वहां मेडिकल टीम की तैनाती भी की गई है। लेकिन इससे लापरवाह और अनजान बन यात्री बिना जांच कराए वापस अपने घर की ओर निकल जा रहे हैं। रेलवे स्टेशन पर इस तरह की लापरवाही बेहद चौंकाने वाली है, सवाल उठ रहा कहीं ये कदम भारी न पड़ जाए...


via WORLD NEWS

Delhi Lockdown News: दिल्ली में कोराना विस्फोट के बीच लॉकडाउन पर क्या बोले सीएम अरविंद केजरीवाल?


नई दिल्ली
राजधानी दिल्ली में कोरोना के मामले लगातार बढ़ते जा रहे हैं। कोरोना के बढ़ते मामलों के बीच लॉकडाउन की आशंका पर सीएम अरविंद केजरीवाल ने दो टूक कहा है कि राजधानी में अभी लॉकडाउन नहीं लगेगा। सीएम ने कहा कि अभी लॉकडाउन नहीं लगेगा लेकिन कुछ नए प्रतिबंध लगाए जा सकते हैं। साथ ही केजरीवाल ने कहा है कि अगर कोरोना वैक्सीन की पर्याप्त डोज हो और उम्र की सीमा हटा दी जाए तो राजधानी के सभी लोगों को 2-3 महीने में वैक्सीन लगाई जा सकती है।

गौरतलब है कि दिल्ली में पिछले 24 घंटे में कोरोना के 8521 नए मामले सामने आए हैं, जबकि 39 लोगों की मौत हुई है। ये दिल्ली में एक दिन में आए कोरोना वायरसके मामलों की दूसरी बड़ी संख्या है। इससे पहले बीते साल 11 नवंबर को 8593 नए केस आए थे।


via WORLD NEWS

Why corona vaccine is important: वैक्सीन लेने के बाद भी हो रहा कोरोना, फिर भी टीका क्यों जरूरी, समझिए एक्सपर्ट डॉक्टर से


देश में ऐसे कई केस आ रहे हैं, जिनमें वैक्सीन लेने के बावजूद लोगों को कोरोना हो रहा है। ऐसे में लोगों के जहन में ये सवाल है कि जब वैक्सीन लेने के बाद भी कोरोना का खतरा रहेगा तो फिर टीके की क्या जरूरत है? इसके अलावा कई लोगों के मन में वैक्सीन को लेकर एक डर या हिचक भी है। ऐसे में हमने जाने माने कैंसर सर्जन और कोरोना एक्सपर्ट डॉक्टर अंशुमान कुमार से इस बारे में बात की। उन्होंने वैज्ञानिक तरीके से समझाया कि वैक्सीन दरअसल काम क्या करती है और इसे लेना सबके लिए क्यों जरूरी है। ध्यान से सुनिए डॉक्टर अंशुमान की बात।


via WORLD NEWS

Friday, April 9, 2021

Bhojpur News: आरा मंडल कारा में छापेमारी, 3 मोबाइल समेत कई आपत्तिजनक सामान बरामद, FIR दर्ज


चंदन कुमार, भोजपुर
बिहार के आरा के मंडल कारा में प्रशासन ने विभिन्न वार्डों में छापेमारी की है। इस कार्रवाई में 3 मोबाइल, 2 सिम कार्ड, 3 चार्जर, खैनी-गुटखा समेत कई आपत्तिजनक सामान बरामद किए गए हैं। आने वाले पंचायत चुनाव के मद्देनजर जिला प्रशासन के निर्देश पर मंडल कारा के कई वार्ड में एकाएक आवश्यक तलाशी अभियान चलाया गया।

बताया जा रहा कि जेल में वॉच टावर के पीछे से लावारिस हालत में 3 मोबाइल, दो सिम कार्ड 3 चार्जर फेंका हुआ मिला है। वॉच टावर के पास एक पॉलिथीन में मोबाइल, चार्जर के साथ-साथ खैनी-गुटखा और कई अन्य सामान बरामद किए गए हैं। जेल अधीक्षक के निर्देश पर आरा के नगर थाने में एफआईआर दर्ज कराई गई है।


via WORLD NEWS

Coronavirus Bihar Update: महाराष्ट्र से आने वाले हर यात्री का रेलवे स्टेशन पर ही कारोना टेस्ट, नीतीश ने दी जानकारी


बिहार में कोरोना को लेकर बढ़ती दहशत के बीच स्वास्थ्य विभाग ने फैसला लिया है कि महाराष्ट्र और पंजाब से आनेवाले सभी यात्रियों का कोरोना टेस्ट कराया जाएगा और जो लोगपॉजिटिव पाए जाएंगे उन्हें क्वारंटीन सेंटर भेजा जाएगा। दरअसल आंकड़ों के मुताबिक दूसरे प्रदेश से आने वाले लोगों की वजह से बिहार में कोरोना ज्यादा फैल रहा है। इसे देखते हुए सरकार ने ये फैसला लिया है। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने कहा कि कोरोना को लेकर तमाम गाइडलाइंस का पालन सुनिश्चित करवाया जा रहा है।


via WORLD NEWS