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Food New York TimesBy BY NIKITA RICHARDSON Via NYT To WORLD NEWS

Sunday, January 3, 2021

हिमाचल में 1400 प्रवासी पक्षियों की रहस्यमयी मौत, बर्ड फ्लू तो नहीं?

शिमला के कांगड़ा जिले स्थित पोंग डैम इलाके में 1400 से अधिक प्रवासी पक्षियों की रहस्यमयी मौत से अफरा-तफरी का माहौल है। कांगड़ा प्रशासन ने बांध के जलाशय में सभी तरह की गतिविधियों में अगले आदेश तक रोक लगा दी है। इसी के साथ वाइल्डलाइफ अथॉरिटी ने मरे हुए पक्षियों के सैंपल भोपाल स्थित हाई सिक्यॉरिटी एनिमल डिसीज लैब में भेजे हैं ताकि मौत के कारण का पता लगाया जा सके। 29 दिसंबर को पोंग डैम झील वाइल्डलाइफ सेंचुरी के फील्ड स्टाफ को पूरे इलाके में मृत पक्षियों को ढूंढने के आदेश दिए गए थे। इस दौरान नगरोटा के जवाली बीट के धमेटा और गुगलारा इलाके के वन्यजीव रेंज के माझर, बथाड़ी, सिहाल, जगनोली, चट्टा, धमेटा और कुठेड़ा में 421 मृच प्रवासी पक्षी मिले। अगले दिन भी मृत पक्षी मिले। बांध के पास किसी गतिविधि की इजाजत नहीं कांगड़ा के डेप्युटी कमिश्नर सह जिलाधिकारी राकेश कुमार प्रजापति ने के तहत आदेश जारी कर कहा कि बांध के जलाशय के एक किमी के दायरे में किसी भी प्रकार की मानवीय या पशुधन की गतिविधियों की इजाजत नहीं होगी। यह इलाका अलर्ट जोन घोषित कर दिया गया है। इसके आगे का 9 किमी का इलाका सर्विलांस जोन है। 'बीमारी की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता' प्रजापति ने बताया, 'इस वक्त किसी तरह की बीमारी की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता है। ऐसे में यह आगे न फैले इसलिए प्रोटोकॉल के अनुसार, बांध के 10 किमी के इलाके तक सुरक्षात्मक उपाय अपनाने जरूरी हैं।' प्रधान मुख्य वन संरक्षक (वन्यजीव) व प्रमुख वन्यजीव वार्डन अर्चना शर्मा ने बताया कि मृत प्रवासी पक्षियों में ज्यादातर बेयरहेडेड गीस है जो सेंट्रल एशिया में पाये जाते हैं। अर्चना ने बताया कि सभी जिलों के डिविजन वन अधिकारी (वाइल्डलाइफ) को उनके अधिकारक्षेत्र के अंदर प्रवासी पक्षियों पर निगरानी रखने के लिए अलर्ट कर दिया गया है।

आज फिर किसानों के साथ बैठेगी सरकार, क्या MSP और कानून वापसी पर बनेगी बात?

नई दिल्ली कृषि कानूनों को लेकर जारी विरोध प्रदर्शनों के बीच आज किसान संगठन और सरकार सातवें दौर की बातचीत करने जा रहे हैं। किसानों की चार प्रमुख मांगों में से दो पर सरकार पहले ही सहमति दे चुकी है। लेकिन, एमएसपी पर लिखित भरोसा और कानून वापसी पर अभी भी गतिरोध जारी है। सरकार को भरोसा है कि इस बार दोनों ओर से जिद की दीवार टूटेगी और आंदोलन समाप्ति की ओर से बढ़ सकता है। बैठक से पहले पीएमओ सक्रिय किसान संगठनों के साथ सातवें दौर की बैठक से पहले प्रधानमंत्री कार्यालय (पीएमओ) सक्रिय है। पीएमओ ने आज होने वाली बैठक को लेकर संबंधित मंत्रियों से फीडबैक लिया है। वहीं प्रस्तावित बातचीत से पहले केंद्र सरकार पूरी तरह सतर्क होकर आगे की रणनीति पर काम कर रही है। किसानों को दिया जा सकता है यह फॉर्म्यूला सराकर भी यह मानकर चल रही है कि किसानों के साथ गतिरोध इतनी आसानी से खत्म नहीं होने वाला है। इसलिए आज होने वाली बैठक में सरकार बीच का रास्ता निकालने के लिए कोई फॉर्म्युला पेश कर सकती है। सूत्रों के अनुसार, सरकार MSP पर लिखित भरोसा देने के विकल्प पर विचार कर रही है। वहीं, कानून को रद्द करने के मुद्दे पर सरकार कानूनों की समीक्षा के लिए कमिटी बनाने का प्रस्ताव दे सकती है। इस कमिटी में किसान संगठनों को ज्यादा प्रतिनिधित्व दिया जा सकता है। क्या राजनाथ बनेंगे सरकार के संकटमोचक को खत्म करने में जुटी केंद्र सरकार के लिए रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह संकटमोचक की भूमिका निभा सकते हैं। किसानों के बीच राजनाथ सिंह की अच्छी छवि का फायदा सरकार भी उठाना चाहती है। इसलिए, रविवार को केंद्रीय कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने राजनाथ सिंह के साथ बैठक की और इस संकट के यथाशीघ्र समाधान के लिए सरकार की रणनीति पर चर्चा की। सूत्रों ने बताया कि तोमर ने सिंह के साथ इस संकट के समाधान के लिए बीच का रास्ता ढूंढने के लिए सभी संभावित विकल्पों पर चर्चा की। 39 दिनों से जारी है किसानों का आंदोलन पिछले 39 दिनों से दिल्ली की सीमाओं पर कड़ाके की ठंड और अब बारिश के बाद भी टिके प्रदर्शनकारी किसानों ने चेतावनी दी है कि यदि तीन नए कृषि कानूनों को वापस लेने और न्यूनतम समर्थन मूल्य को कानूनी स्वरूप प्रदान करने की उनकी दो बड़ी मांगें सरकार चार जनवरी की बैठक में नहीं मानती है तो वे अपना आंदोलन तेज करेंगे। पराली और बिजली वाले कानूनों पर बनी सहमति पांच दौर की वार्ता के बेनतीजा रहने के बाद 30 दिसंबर को छठे दौर की वार्ता में सरकार और 40 किसान संगठनों के बीच बिजली की दरों में वृद्धि एवं पराली जलाने पर जुर्माने पर प्रदर्शनकारी किसानों की चिंताओं के समाधान पर बात बनी थी। लेकिन तीन कृषि कानूनों के निरसन एवं एमएसपी को कानूनी गारंटी देने के विषय पर दोनों पक्षों में गतिरोध कायम है। सरकार को सकारात्मक बातचीत की उम्मीद एक जनवरी को तोमर ने कहा था कि सरकार चार जनवरी को किसान संगठनों के साथ अगले दौर की बैठक में ‘सकारात्मक नतीजे’ आने को लेकर आशान्वित है लेकिन उन्होंने इस बारे में कुछ भी कहने से इनकार किया कि क्या सातवां दौर वार्ता का आखिरी दौर होगा। जब उनसे पूछा गया कि क्या उन्हें उम्मीद है कि चार जनवरी की बैठक आखिरी दौर होगा, तो उन्होंने कहा, ‘मैं ऐसा पक्के तौर पर नहीं कह सकता। मैं कोई ज्योतिषी नहीं हूं। मैं आशान्वित हूं कि (बैठक में) जो भी निर्णय होगा, वह देश और किसानों के हित में होगा।’

Listen to Excerpts From the President’s Call


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