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Friday, January 8, 2021

शहर की कच्ची बस्ती में पढ़ने वाली निर्मल ने रचा इतिहास, बाड़मेर के सबसे बड़े अस्पताल में बनीं डॉक्टर

बाड़मेर। कहते हैं मेहनत और लगन से किसी लक्ष्य को हासिल करना चाहों तो कोई भी मुश्किल आपके हौसले को रोक नहीं सकती। ऐसे ही हौसलों के पंखों को परवान देकर सरहदी बाड़मेर जिले की निर्मल ने न केवल अपने समाज मे बल्कि अपने जिले में खुद के नाम की पताका फहरा दी है। निर्मल चौहान ने बाड़मेर में की न केवल पहली डॉक्टर बनने का गौरव हासिल किया है बल्कि बाड़मेर जिले की पहली बेटी भी बनी है जिसकी एमबीबीएस की पढ़ाई से पूरी की है। निर्मल ने एमबीबीएस पूरी करने के बाद जब अपने ही गृह नगर बाड़मेर के सबसे बड़े अस्पताल में बतौर चिकित्सक पदभार संभाला तो हर कोई बधाई देता नजर आया। बाड़मेर में इन दिनों निर्मल चौहान के हर तरफ चर्चे है, वजह निर्मल की वह उपलब्धि है जिसने इतिहास रच दिया है। निर्मल बाड़मेर जिले के जटिया समाज की पहली डॉक्टर है। निर्मल जोधपुर एम्स से एमबीबीएस करने वाली पहली बेटी बनने की उपलब्धि अपने नाम लिखा चुकी है। जटिया समाज के लोगों ने निर्मल की इस शानदार उपलब्धि पर खुशी जाहिर करते हुए उनके परिजनों का स्वागत किया। अपने जिले के सबसे बड़े अस्पताल में डॉक्टर बनीं साल 2014 में एमबीबीएस में चयनित हुई निर्मल ने अपनी एमबीबीएस डिग्री जोधपुर एम्स में पूर्ण कर अपने ही जिले के सबसे बड़े अस्पताल राजकीय चिकित्सालय बाड़मेर में बतौर डॉक्टर पदभार ग्रहण किया। जटिया समाज की निर्मल समाज की वो बेटी बन चुकी है जिससे प्रेरणा लेकर और बेटियों भी चिकित्सा के क्षेत्र में आगे बढ़ती नजर आएंगी। बाड़मेर में डॉक्टर निर्मल समाज की पहली डॉक्टर बनी है। उनके माता पिता का प्रोत्साहन और निर्मल की कठोर मेहनत आज रंग लाई। कच्ची बस्ती में ही शुरुआती पढ़ाईनिर्मल के पिता भोमाराम चौहान एक सरकारी अध्यापक है। उन्होंने अपने बच्चों को शिक्षा के क्षेत्र में आगे रखकर समाज का मान बढ़ाया। उनका कहना है कि समाज के लोगों को इनसे प्रेरणा लेकर शिक्षा और चिकित्सा के क्षेत्र में आगे आना चाहिए, तभी समाज का विकास होगा। डॉक्टर निर्मल ने पद संभालने के बाद बताया कि उसकी प्रारम्भिक शिक्षा कच्ची बस्ती के विद्यालय में हुई, पढ़ाई को लेकर वे सदैव कठोर परिश्रम करती थीं। वह बताती हैं कि केवल पढ़ाई को ही अपना लक्ष्य बना रखा था साथ ही लक्ष्य पाने के लिए मेहनत जरूरी है। अगर आप मेहनत करते हो तो लक्ष्य आप से दूर नहीं। कभी बेटियों की कब्रगाह कहलाता था बाड़मेर सरहदी बाड़मेर की के पहली महिला चिकित्सक बनने पर न केवल जटिया समाज में बल्कि पूरे बाड़मेर में उसकी सफलता की लोग मिसाल दे रहे हैं। कभी बेटियों की कब्रगाह कहा जाने वाले जिले में अब यहां की बेटियों की आतिशी सफलता की वजह से बाड़मेर देश भर में अपनी नई पहचान बना रहा है। यह नई पहचान बाड़मेर के हर वाशिंदों को न केवल बेहद रास आ रही है बल्कि हर कोई पूरजोर तरीके से इसकी तारीफ करते नहीं थक रहा है।

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