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Don’t Travel on Memorial Day Weekend. Try New Restaurants Instead.

Food New York TimesBy BY NIKITA RICHARDSON Via NYT To WORLD NEWS

Friday, July 30, 2021

मिजोरम CM का दावा- पहले असम पुलिस ने चलाई गोली, शांत‍ि से समाधान न‍िकालने की वकालत

नई द‍िल्‍ली असम और मिजोरम के बीच अंतरराज्यीय सीमा पर सुरक्षा बलों को तैनात किए जाने पर बयानबाजी भी शुरू हो गई है। मिजोरम के मुख्यमंत्री ज़ोरामथांगा की तरफ से कहा गया है क‍ि असम पुलिस ने पहले गोली चलाई थी। साथ ही सीएम ने दोनों राज्‍यों के बीच शांति से बातचीत के जरिए समाधान निकलने की बात कही है। उधर, असम के मुख्‍यमंत्री ने भी पलटवार क‍िया है। दरअसल असम और मिजोरम के बीच कुछ दिन पहले सीमा के निकट हिंसक झड़प हुई थी, जिसमें छह पुलिसकर्मियों और एक आम निवासी की मौत हो गई थी। असम पुलिस ने मिजोरम से राज्यसभा के इकलौते सदस्य के. वनलालवेना को अंतराज्यीय सीमा पर हुई हिंसा की 'साजिश' में कथित संलिप्तता के बारे में पूछताछ के लिए एक अगस्त को बुलाया है। असम पुलिस ने यह भी कहा कि वह सोमवार को सीमा पर हुई हिंसा को लेकर कथित रूप से 'भड़काऊ' बयान देने के वाले वनलालवेना के खिलाफ 'कानूनी कार्रवाई' भी कर सकती है। उस हिंसा में पांच पुलिसकर्मियों और एक व्यक्ति की मौत हो गई थी। द‍िल्‍ली में सांसद के घर पहुंची असम पुल‍िस आधिकारिक सूत्रों के अनुसार दिल्ली आई असम पुलिस सीआईडी की एक टीम वनलालवेना को खोजने उनके आवास और मिजोरम सदन गई, लेकिन वह वहां नहीं मिले। सूत्रों ने कहा कि माना जा रहा है कि वनलालवेना टीम से बच रहे हैं। सांसद की ओर से कोई प्रतिक्रिया नहीं मिली। मिजोरम के रेजिडेंट कमिश्नर ने असम पुलिस की जांच में शामिल होने के लिए वनलालवेना को दिए गए किसी भी नोटिस को प्राप्त करने से इनकार कर दिया, इसलिए सीआईडी टीम ने उनके आवास पर नोटिस चिपकाया है। असम पुल‍िस ने नोट‍िस में कही ये बात असम पुलिस के नोटिस में कहा गया है, 'पता चला है कि आपने घटना के संबंध में मीडिया में सिविल और पुलिस अधिकारियों को निशाना बनाते हुए धमकी भरा बयान दिया है जो जांच का विषय है। इसलिए, तथ्यों और परिस्थितियों का पता लगाने के लिए आपसे पूछताछ की जानी है।' मिजोरम के सांसद को असम के कछार जिले के ढोलई पुलिस थाने के प्रभारी अधिकारी के सामने एक अगस्त को सुबह 11 बजे पेश होने के लिए कहा गया है। दोनों राज्‍यों के बीच शांत‍ि की अपील पूर्वोत्तर सांसद फोरम ने शुक्रवार को असम और मिजोरम की सरकारों से अपनी अंतरराज्यीय सीमा पर शांति सुनिश्चित करने की अपील की और क्षेत्र के लोगों से एकजुटता एवं भाईचारे के साथ रहने का भी आग्रह किया। पूर्वोत्तर सांसद फोरम (नॉर्थ ईस्ट एमपी फोरम) के अध्यक्ष और केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू तथा फोरम के महासचिव और शिलांग से सांसद विंसेंट एच पाला ने एक संयुक्त बयान में दोनों राज्यों से लंबे समय से लंबित सीमा विवाद को सुलझाने के ईमानदार उद्देश्य के साथ आगे आने की अपील की।

Thursday, July 29, 2021

WORLD NEWS: PEZ Candy debunks TikTok video while revealing 'proper way' to load PEZ dispenser


"PEZ Candy debunks TikTok video while revealing 'proper way' to load PEZ dispenser PEZ Candy USA has spoken out about the viral TikTok video that’s led some people to believe there’s a way to load its tablets into a dispenser and remove the wrapper all at once. " Via FOX NEWS To WORLD NEWS

पेगासस विवाद: अरुंधति, रोमिला थापर समेत 500 हस्तियों ने CJI को लिखा खत

नई दिल्ली जासूसी मामले में देश भर के 500 से ज्यादा लोगों और समूहों ने के चीफ जस्टिस को लेटर लिखकर मामले में दखल देने की गुहार लगाई है। लेटर में कहा गया है कि पेगासस स्पाईवेयर का इस्तेमाल कर जर्नलिस्टों , विरोधी दल के नेताओं व अन्य के फोन के जरिए जासूसी की गई है। खत के जरिए तमाम सवाल उठाते हुए चीफ जस्टिस से गुहार लगाई गई है कि सुप्रीम कोर्ट मामले की जांच करे कि क्या किसी भारतीय संस्थान या कंपनी ने पेगागस की खरीद की थी? अगर ऐसा है तो फिर उसका पेमेंट कैसे किया गया? खत में यह भी जांच की मांग की गई है कि अगर पेगासस की खरीद हुई है तो किसकी जासूसी करनी है, यह कैसे तय हुआ। उस जानकारी से क्या फायदा हुआ है। इस तरह के टारगेट का जस्टिफिकेशन क्या है? जर्नलिस्ट, राजनेताओं, वकीलों, मानवाधिकार एक्टिविस्टों और सुप्रीम कोर्ट स्टाफ के निजता के उल्लंघन के मामले में कौन सी संवैधानिक अथॉरिटी निगरानी कर रहा है। लेटर में कहा गया है कि सिर्फ सुप्रीम कोर्ट पर लोगों का भरोसा है खासकर महिलाओं का भरोसा है। ऐसे में जो सवाल उठ रहे हैं, उसे सुप्रीम कोर्ट ही देख सकता है। सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस को लिखे लेटर में कहा गया है कि सीजेआई रंजन गोगोई पर सेक्शुअल हरैसमेंट का आरोप लगाने वाली महिला स्टाफ के मोबाइल की भी हैकिंग हुई है। मानवाधिकार ऐक्टिविस्ट को भी इसका शिकार बनाया गया है। इस खत में कहा गया है कि उम्मीद की जाती है कि सुप्रीम कोर्ट ऑफिस इस मामले में नोटिस लेने में कोई देरी नहीं करेगा और लोगों के अधिकार की रक्षा के लिए जो सवाल उठे हैं, उसे देखेगा। लेटर लिखने वालों में ऐक्टिविस्ट अरुणा राय, हर्ष मंदर, अंजली भारद्वाज, वकील वृंदा ग्रोवर, जूमा सेन, प्रतीक्षा बक्शी, शिक्षाविद व साइंटिस्ट जोया हुसैन, रोमिला थापर, लेखक अरुंधति राय, राजनेता मनोज झा, जर्नलिस्ट अनुराधा भसीन आदि शामिल हैं। इसके अलावा रिटायर सरकारी अधिकारी, रिटायर आर्म्ड फोर्स के अधिकारी और अन्य शामिल हैं।

'2024 में खेला नहीं, मोदी का मेला होगा...सदन में जो हंगामा करे, दो साल के लिए निलंबित करो'

नई दिल्ली रिपब्लिकन पार्टी ऑफ़ इंडिया (ए) के अध्यक्ष और केंद्रीय मंत्री रामदास आठवले अपने चुटीले अंदाज और बात को कविता के रूप में प्रस्तुत करने के लिए जाने जाते हैं। एक दिन पहले पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने 2024 में पूरे देश में 'खेला होबे' की बात की तो आठवले ने अपने अंदाज में पलटवार किया है। उन्होंने बृहस्पतिवार को कहा कि पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की अगुआई में भले ही सभी विपक्षी दल एकजुट हो जाएं, लेकिन अगले लोकसभा चुनाव में कोई ‘खेला’ नहीं होगा क्योंकि उस चुनाव में भी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का ही ‘मेला’ होगा। दरअसल, ममता बनर्जी इन दिनों दिल्ली में प्रमुख विपक्षी दलों के नेताओं से मुलाकात कर रही हैं। उनके इस दिल्ली दौरे को भाजपा विरोधी मोर्चे के लिए सभी विपक्षी दलों को एकजुट करने के प्रयास के तौर पर देखा जा रहा है। केंद्रीय सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता राज्य मंत्री आठवले ने दावा किया, ‘2024 में ‘खेला’ नहीं सत्ता के लिए मोदी का मेला होगा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में 2024 में NDA की सरकार बनने से दुनिया की कोई ताक़त रोक नहीं सकती, चाहे ममता बनर्जी के नेतृत्व में कितने ही राजनीतिक दल एकजुट क्यों न हो जाएं।’ पेगासस के मुद्दे पर संसद में विपक्षी दलों के हंगामे को लेकर उन्होंने कहा, ‘तीन दिन तक हंगामा ठीक है, चौथे दिन सीट छोड़कर हंगामा करने पर सदस्यों को दो साल तक निलंबित करने का नियम होना चाहिए। इससे सदन में हंगामा रोकने में मदद मिलेगी।’

एयरपोर्ट पर पूछा 'आप कौन हैं' ? पूर्व CM बोले, गांधी जैसा अपमानित महसूस कर रहा हूं

पणजी गोवा के पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस नेता लुइजिन्हो फलेरियो () को प्रदेश के लोग और कर्मचारी नहीं जानते! यह सुनने में भले ही अजीब लगे लेक‍िन पूर्व मुख्‍यमंत्री के साथ ऐसी ही घटना गोवा एअरपोर्ट पर हुई। इस बात का ज‍िक्र पूर्व मुख्‍यमंत्री ने गुरुवार को व‍िधानसभा में क‍िया। लुइजिन्हो फलेरियो ने अपने साथ हुई घटना को महात्मा गांधी के 1893 में दक्षिण अफ्रीकी ट्रेन से नस्लवादी निष्कासन से जोड़ा। कांग्रेस कार्यसमिति के पूर्व सदस्य फलेरियो ने राज्य के एकमात्र एयरपोर्ट पर गोवावासियों के गैर-रोजगार से संबंधित शून्यकाल प्रस्ताव को उठाते हुए इसकी तुलना की। फलेरियो ने कहा क‍ि दूसरे दिन लगभग दो या तीन साल बाद मैं एअरपोर्ट पर गया। मैं वीआईपी लाउंज में गया। वहां उन्होंने मुझसे पूछा कि आप कौन हैं? मैंने कहा (जवाब में), आप कहां से हैं? क्या आप गोवा से हैं? फलेरियो दो बार गोवा के मुख्यमंत्री रह चुके हैं। उन्होंने कहा क‍ि माननीय सीएम, मुझे अपमानित महसूस नहीं हुआ क्योंकि दक्षिण अफ्रीका में महात्मा गांधी के साथ ऐसा हुआ था। लेकिन मुझे उम्मीद नहीं थी कि हमारे साथ और गोवा में ऐसा होगा। जब महात्‍मा गांधी दक्षिण अफ्रीका गए, तो रेलवे टर्मिनल पर उन्हें बाहर कर दिया गया। मैं आभारी हूं कि मुझे गोवा हवाई अड्डे से मेरे सामान के साथ बाहर नहीं फेंका गया। गांधीजी के साथ हुई घटना को अपने से जोड़ा फलेरियो 7 जून, 1893 को दक्षिण अफ्रीका के पीटरमैरिट्जबर्ग रेलवे स्टेशन पर नस्लवादी आधार पर गांधी को ट्रेन के प्रथम श्रेणी के डिब्बे से बेदखल करने की बात कर रहे थे। उन्होंने यह भी कहा कि एक बार जब उन्होंने उन्हें पहचान लिया, तो वीआईपी लाउंज में तैनात हवाई अड्डे के कर्मचारी 'बेहद विनम्र' थे। एयरपोर्ट पर भर्ती मामले को लेकर कही ये बातफलेरियो ने कहा कि हवाई अड्डे पर स्थानीय गोवावासियों की भर्ती के मामले में 'शत्रुतापूर्ण भेदभाव' था। फलेरियो कहा क‍ि गोवा का हवाई अड्डा एक अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा है। हम सभी डाबोलिम हवाई अड्डे से यात्रा कर रहे हैं। लेकिन एक बहुत ही दुखद और मानवीय मुद्दा है। विशेष रूप से यह मुद्दा गोवा और गोवा के लोगों को प्रभावित कर रहा है जो डाबोलिम हवाई अड्डे पर काम कर रहे थे।

भले अल्पमत में हों, सच तो सच होता है... राहुल ने फिर किया राफेल में भ्रष्टाचार का दावा

नई दिल्ली कांग्रेस पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी ने एक हालिया न्यूज रिपोर्ट के हवाले से फिर दावा किया है कि राफेल डील में बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार हुआ है। उन्होंने डील में कथित तौर पर 'अंतरराष्ट्रीय स्तर के भ्रष्टाचार' से जुड़ी न्यूज रिपोर्ट की हेडलाइन के स्क्रीन शॉट को महात्मा गांधी के एक कथन के साथ ट्वीट किया है। राहुल गांधी ने लिखा कि सच तो सच होता है। एक फ्रेंच एनजीओ के हवाले से ऑनलाइन छपी न्यूज रिपोर्ट के स्क्रीन शॉट को शेयर करते हुए राहुल गांधी ने ट्वीट किया, 'राफेल डील में बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार हुआ है।' इसके साथ ही उन्होंने महात्मा गांधी को उद्धृत करते हुए लिखा है, 'अगर आप सही हैं और आप इसे जानते हैं तो दिल की बात कहिए। भले ही आप अल्पमत में हों लेकिन सच तो सच होता है।' राहुल गांधी ने जिस वेबसाइट की न्यूज रिपोर्ट को शेयर किया है, उसका शीर्षक है- 'राफेल डील में अंतरराष्ट्रीय भ्रष्टाचार के सभी तत्व मौजूद, भारत के राष्ट्रीय हितों के भी खिलाफ- फ्रेंच एनजीओ' न्यूज रिपोर्ट में एक फ्रेंच एनजीओ 'शेरपा' के हवाले से की बात कही गई है। यह वही एनजीओ है जिसकी शिकायतों के बाद फ्रांस में राफेल डील की स्वतंत्र न्यायिक जांच के आदेश दिए गए। एनजीओ ने राफेल बनाने वाली कंपनी दसॉ की तरफ से अनिल अंबानी की कंपनी रिलायंस डिफेंस लिमिटेड को ऑफसेट पार्टनर बनाने पर सवाल उठाया है, जिसको एविएशन में पहले का कोई अनुभवन नहीं है। राहुल गांधी शुरुआत से ही राफेल डील में भ्रष्टाचार का आरोप लगाते रहे हैं। 2019 के लोकसभा चुनाव में भी उन्होंने इसे जोर-शोर से उठाया था। दूसरी तरफ, सरकार डील में भ्रष्टाचार के आरोपों को सिरे से खारिज करती रही है। दरअसल भारत ने फ्रांस सरकार के साथ 2016 में 36 राफेल लड़ाकू विमानों के खरीद का सौदा किया था। भारत को अबतक 26 राफेल लड़ाकू विमान मिल भी चुके हैं।

सुपरटेक एमराल्ड कोर्ट प्रॉजेक्ट को नियम के तहत मंजूरी, नोएडा अथॉरिटी की SC में दलील

नई दिल्ली में सुपरटेक के एमराल्ड कोर्ट प्रॉजेक्ट से जुड़े मामले की सुनवाई के दौरान नोएडा अथॉरिटी ने कहा कि प्रॉजेक्ट को नियम के तहत मंजूरी दी गई थी। साथ ही दलील दी कि प्रॉजेक्ट में किसी भी ग्रीन एरिया और ओपन स्पेस समेत किसी भी नियम का उल्लंघन नहीं किया गया है। उनके अधिकारियों ने कोई नियम नहीं तोड़ा है। मौजूदा कानून के तहत प्रॉजेक्ट के प्लान को मंजूरी दी गई है। वहीं फ्लैट बॉयर्स की ओर से दलील दी गई है कि बिल्डर ग्रीन एरिया को नहीं बदल सकता है। जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ की अगुवाई वाली बेंच में इलाहाबाद हाई कोर्ट के फैसले के खिलाफ सुपरटेक लिमिटेड की अपील पर फाइनल सुनवाई शुरू हुई है। हाई कोर्ट ने 2014 के आदेश में नोएडा स्थित ट्विन टावर को तोड़ने और अथॉरिटी के अधिकारियों पर कार्रवाई का आदेश दिया था। सुप्रीम कोर्ट ने हाई कोर्ट के आदेश पर अपील के दौरान रोक लगा दी थी। सुप्रीम कोर्ट में इस मामले में फाइनल सुनवाई शुरू हुई है अगली सुनवाई तीन अगस्त को होगी। नोएडा अथॉरिटी की ओर से पेश वकील रवींद्र कुमार ने दलील पेश करते हुए कहा कि इस प्रॉजेक्ट में उनके अफसरों ने किसी भी बॉयलॉज की अनदेखी नहीं की है। साथ ही कहा कि हाउसिंग सोसायटी के ओरिजिनल प्लान और राइवाइज प्लान नियम के तहत ही मंजूरी दी गई है। जो भी मौजूदा कानून थे उसके हिसाब से प्रॉजेक्ट को मंजूरी दी गई है। वहीं नोएडा स्थित एमराल्ड कोर्ट ओनर रेजिडेंट्स वेलफेयर असोसिशन के वकील जयंत भूषण ने दलील दी कि एफएआर बढ़ाए जाने के बाद भी बिल्डर ग्रीन एरिया नहीं बदल सकती है। फ्लोर एरिया रेशियो बढ़ाए जाने का फायदा उठाते हुए दो बड़े टावर खड़े किए गए और ग्रीन एरिया पर अतिक्रमण किया गया। भूषण ने दलील दी कि बायलॉज के मुताबिक बिल्डर ग्रीन एरिया बिना फ्लैट ओनर की सहमति के नहीं बदल सकता है। गार्डेन एरिया फ्लैट बॉयर्स को ब्रोसर में दिखाया गया था, साथ ही कंप्लीशन प्लान में भी था और उस पर 40 माले की बिल्डिंग बनाई गई। वहीं सुपरटेक की ओर से पेश सीनियर एडवोेकेट विकास सिंह ने कहा कि इस मामले में 1500 होम बॉयर्स से सहमति का सवाल नहीं था क्योंकि सेक्शन प्लान के काफी बाद आरडब्ल्यूए अस्तित्व में आया था। 16 मीटर की दूरी का जो क्राइटीरिया है, उसका मतलब दो ब्लॉक के बीच की दूरी से नहीं है बल्कि सिंगल अलग बिल्डिंग से है। मौजूदा प्लान में वह मौजूद है। नया कंस्ट्रक्शन किसी भी तरह से किसी फायर सेफ्टी प्रोटोकॉल का उल्लंघन नहीं है। 9 जुलाई को सुप्रीम कोर्ट को बताया गया था कि सुपरटेक लिमिटेड बिल्डर कंपनी ने एमरल्ड कोर्ट प्रॉजेक्ट में होम बॉयर्स के पैसे रिफंड कर दिए हैं, सुप्रीम कोर्ट ने इसके बाद सुपरटेक के खिलाफ चल रहे कंटेप्ट केस को बंद कर दिया। एमरल्ड कोर्ट प्रॉजेक्ट के डिमोलिशन का आदेश इलाहाबाद हाई कोर्ट ने दिया था। जिसके बाद मामला सुप्रीम कोर्ट के सामने आया था। कोर्ट सलाहकार गौरव अग्रवाल ने कहा था कि सवाल सिर्फ ये बचा हुआ है कि क्या वहां कंस्ट्रक्शन की इजाजत नोएडा अथॉरिटी ने जो दी थी और क्या वह कानूनी है या नहीं।