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Food New York TimesBy BY NIKITA RICHARDSON Via NYT To WORLD NEWS

Saturday, December 19, 2020

विपक्ष ने आंदोलन को हवा दी? किसानों ने PM मोदी और कृषि मंत्री को भेजा खत

नई दिल्ली ऑल इंडिया किसान संघर्ष को-ऑर्डिनेशन कमिटी ने शनिवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर के नाम खत लिखकर दो टूक कहा है कि उनका आंदोलन अराजनीतिक है। खत में कमिटी ने जोर दिया है कि किसानों का आंदोलन किसी राजनीतिक दल से नहीं जुड़ा है। पीएम मोदी और तोमर को अलग-अलग हिंदी में लिखे खत में AIKSCC ने कहा है कि सरकार का यह मानना गलत है कि किसानों के आंदोलन के पीछ विपक्षी पार्टियों का हाथ है। यह पत्र ऐसे वक्त में लिखा गया है जब एक दिन पहले ही प्रधानमंत्री ने विपक्षी दलों पर किसानों को तीन कृषि कानूनों को लेकर गुमराह करने का आरोप लगाया था। कृषि कानूनों के खिलाफ प्रदर्शन करने वाले करीब 40 किसान यूनियनों में से एक AIKSCC ने पीएम के नाम अपने खत में लिखा है, 'सच्चाई तो यह है कि किसान आंदोलन ने राजनीतिक दलों को अपने विचार बदलने पर मजबूर किया है और आपका (प्रधानमंत्री मोदी) यह दावा कि राजनीतिक दलों ने इसे हवा दी है, गलत है।' दरअसल, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार को मध्य प्रदेश के किसानों को संबोधित करते हुए नए कृषि कानूनों का पुरजोर बचाव किया। उन्होंने कहा कि ये कानून एक दिन में नहीं बने हैं बल्कि दशकों से इसकी तैयारी चल रही थी। पीएम ने कहा था कि अपनी राजनीतिक जमीन खिसकने की वजह से अभी इन कानूनों का विरोध करने वाले कभी इन्हीं सुधारों के पक्षधर थे। AIKSCC ने अपने खत में लिखा है, 'आंदोलन कर रहे किसान संगठनों और समूहों में से किसी की भी कोई भी मांग किसी राजनीतिक दल से नहीं जुड़ी हुई है।' वहीं, कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर को लिखे खुले खत में किसान संगठन ने आरोप लगाया है कि तीनों कृषि कानूनों में गड़बड़ियां हैं। AIKSCC ने आरोप लगाया है कि कृषि मंत्री बातचीत में मुख्य मुद्दे से ध्यान भटका रहे थे। इससे पहले गुरुवार को किसानों को लिखे एक खुले खत में कृषि मंत्री तोमर ने कांग्रेस और दूसरी विपक्षी पार्टियों पर नए कृषि कानूनों को लेकर झूठ फैलाने का आरोप लगाया था। उन्होंने किसानों से इन झूठ के चक्कर में न आने की अपील की और कहा कि केंद्र उनकी हर चिंताओं को दूर करने के लिए तैयार है।

सोनिया की मीटिंग में राहुल के पक्ष में बना माहौल, पर असंतुष्टों ने रख दी अलग मांग

नई दिल्लीकांग्रेस की अंतरिम अध्यक्ष के साथ शनिवार को हुई बैठक में पार्टी के वरिष्ठ नेताओं ने राहुल गांधी को फिर से पार्टी की कमान सौंपे जाने की इच्छा जताई। हालांकि, कुछ महीने पहले व्यापक संगठनात्मक बदलाव की मांग को लेकर पत्र लिखने वाले नेताओं ने अध्यक्ष पद के लिए चुनाव और पार्टी के भीतर नेताओं की जवाबदेही सुनिश्चित करने पर जोर दिया। राहुल को अध्यक्ष बनाने की उठी मांग कांग्रेस सूत्रों का यह भी कहना है कि बैठक में राहुल गांधी ने कहा कि वह पार्टी की ओर से दी जाने वाली किसी भी जिम्मेदारी को निभाने के लिए तैयार हैं और अध्यक्ष को चुनने का फैसला चुनाव पर छोड़ना चाहिए। दूसरी तरफ, पत्र लिखने वाले नेताओं के धड़े ने राहुल गांधी की ओर से ऐसी कोई टिप्पणी किए जाने से इनकार किया है। कांग्रेस सूत्रों ने बताया कि बैठक में मौजूद सभी नेताओं ने एकमत से राहुल गांधी को अध्यक्ष बनाए जाने की इच्छा जाहिर की। इन नेताओं में कई ऐसे वरिष्ठ नेता भी शामिल थे, जिन्होंने सक्रिय नेतृत्व और व्यापक संगठनात्मक बदलाव की मांग को लेकर पहले पत्र लिखा था। इन नेताओं को G-23 नाम से चर्चा मिली थी क्योंकि अगस्त में सोनिया गांधी को खत लिखने वालों में 23 नेता शामिल थे। असंतुष्ट नेताओं ने अध्यक्ष के लिए चुनाव पर दिया जोर सूत्रों का कहना है कि राहुल गांधी ने कहा, ‘मैं वरिष्ठ नेताओं को महत्व देता हूं। इनमें से बहुत सारे लोगों ने मेरे पिता के साथ काम किया है।’ सूत्रों ने यह भी बताया कि पत्र लिखने वाले नेताओं के धड़े ने अध्यक्ष पद के लिए चुनाव पर जोर दिया ताकि इसकी विश्वसनीयता बढ़ सके। साथ ही, उन्होंने यह भी कहा कि पार्टी के भीतर नेताओं को जिम्मेदारी दिए जाने के बाद उनकी जवाबदेही भी सुनिश्चित की जानी चाहिए। बैठक में सोनिया गांधी ने कहा कि सभी नेताओं को साथ मिलकर चलने और संगठन को मजबूत बनाने की जरूरत है। उन्होंने यह भी कहा कि आने वाले समय में संगठन, तमाम मुद्दों पर सरकार को घेरने और अन्य मुद्दों पर चर्चा के लिए चिंतन शिविर का आयोजन किया जाएगा। पार्टी में कोई झगड़ा नहीं, सबको सोनिया, राहुल के नेतृत्व में भरोसा: गहलोत बैठक के बाद पार्टी के वरिष्ठ नेता और राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने संवाददाताओं से कहा, ‘राजनीति में जो होता है, वो दिखता नहीं और जो दिखता है वो होता नहीं। जब सभी नेताओं को राहुल गांधी और सोनिया जी के नेतृत्व में विश्वास है तो फिर झगड़ा कहां है।’ उन्होंने यह भी बताया, ‘बैठक में सभी की इच्छा थी कि राहुल गांधी पार्टी का नेतृत्व करें और सब मिलकर उन ताकतों के खिलाफ लड़ें, जो देश में लोकतंत्र को खत्म कर रही हैं।’ महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री पृथ्वीराज चव्हाण ने बताया, ‘आज यह पहली बैठक थी। आगे ऐसी बैठकें और होंगी। शिमला और पंचमढ़ी की तर्ज पर चिंतन शिविर भी होगा।’ उन्होंने कहा, ‘‘अच्छे वातावरण में चर्चा हुई। पार्टी को मजबूत करने के लिए जो भी मुद्दे उठाए गए थे, उनका संज्ञान लिया जाएगा। आगे कुछ लोग बैठेंगे और उनकी बात भी सुनी जाएगी।’ असंतुष्ट नेता भी बैठक में हुए शामिल राहुल गांधी और पार्टी के वरिष्ठ नेताओं ए के एंटनी, अंबिका सोनी, अशोक गहलोत, पी चिदंबरम, कमलनाथ और हरीश रावत की मौजूदगी में पत्र लिखने वाले नेताओं की सोनिया से मुलाकात हुई। सोनिया के आवास 10 जनपथ पर हुई इस बैठक में गुलाम नबी आजाद, आनंद शर्मा, मनीष तिवारी, शशि थरूर और कई अन्य नेता शामिल हुए। ये नेता पत्र लिखने वाले 23 नेताओं में शामिल थे। सूत्रों ने बताया कि सोनिया गांधी के साथ इन नेताओं की मुलाकात की भूमिका तैयार करने में मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यममंत्री कमलनाथ की अहम भूमिका थी। कमलनाथ ने कुछ दिनों पहले भी सोनिया से मुलाकात की थी। अगस्त में 23 नेताओं ने सोनिया को लिखा था खत दरअसल इस साल अगस्त महीने में गुलाम नबी आजाद, आनंद शर्मा और कपिल सिब्बल समेत कांग्रेस के 23 नेताओं ने सोनिया गांधी को पत्र लिखकर पार्टी का पूर्णकालिक अध्यक्ष चुने जाने और व्यापक संगठनात्मक बदलाव करने की मांग की थी। इसे कांग्रेस के कई नेताओं ने पार्टी नेतृत्व और खासकर गांधी परिवार को चुनौती दिए जाने के तौर पर लिया। कई नेताओं ने गुलाम नबी आजाद के खिलाफ कार्रवाई की मांग भी की। बिहार विधानसभा चुनाव और कुछ प्रदेशों के उप चुनावों में कांग्रेस के निराशाजनक प्रदर्शन के बाद भी, आजाद और सिब्बल ने पार्टी की कार्यशैली की खुलकर आलोचना की थी और इसमें व्यापक बदलाव की मांग की थी। इसके बाद वे फिर से कांग्रेस के कई नेताओं के निशाने पर आ गए।

Quotation of the Day: ‘Be Sleek and Silent’: How China Censored Bad News About Covid


Today’s Paper New York TimesBy Unknown Author Via NYT To WORLD NEWS

Celebrate Kwanzaa With a Craft Workshop and Take Some Time to Meditate


At Home New York TimesBy BY KATHERINE CUSUMANO AND EMMA GRILLO Via NYT To WORLD NEWS

Pick Up the Knitting Needles for a Mood Booster


At Home New York TimesBy BY KATE ATHERLEY Via NYT To WORLD NEWS

Lawmakers Resolve Fed Dispute as They Race to Close Stimulus Deal


U.S. New York TimesBy BY EMILY COCHRANE AND JEANNA SMIALEK Via NYT To WORLD NEWS

गिरिराज सिंह ने किसान आंदोलन पर उठाए सवाल, कहा- कांग्रेस और कम्युनिस्ट के लोग हैं दोगले, फिर बोले दोगला शब्द है संवैधानिक


संदीप कुमार, बेगूसराय
कृषि कानूनों के खिलाफ किसानों के आंदोलन पर केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह ने सवाल उठाए हैं। बिहार के बेगूसराय में केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह ने कहा कि इस आंदोलन में किसान संघ के लोग कम हैं। इसमें थके-हारे लोग हैं जिनको जनता ने रिजेक्ट कर दिया है। चाहे कांग्रेस के लोग हों या कम्युनिस्ट के लोग यह लोग दोगले हैं। दोगला शब्द भारत का संवैधानिक शब्द है जिसकी दो जुबान चलती है।

'जो सीएए समर्थक थे वो कर रहे किसान आंदोलन का समर्थन'
गिरिराज सिंह ने कहा कि कृषि बिल के समर्थन में लोग प्रधानमंत्री को हस्ताक्षर कर भेज रहे हैं। जो सीएए के समर्थक थे वह आज किसान आंदोलन को समर्थन कर रहे हैं। ये लोग प्रधानमंत्री का विरोध करते-करते देश का विरोध करने लगे हैं। कृषि बिल किसानों के हित में है और प्रधानमंत्री ने कहा है 2022 तक किसानों की आय दोगुनी होगी जो होकर रहेगा। किसान आंदोलन में विपक्ष किसानों के कंधे पर बंदूक रखकर चला रही है। किसानों के सुझाव के लिए केंद्र सरकार का दरवाजा हमेशा खुला है।

'ममता बन गई हैं तुष्टिकरण का प्रतीक'
पश्चिम बंगाल को लेकर गिरिराज सिंह ने कहा कि आज टीएमसी में भगदड़ मच रही है। ममता तुष्टिकरण की प्रतीक बन गई हैं और वहां गैर मुस्लिमों का रहना दुभर हो गया है। केंद्रीय मंत्री ने कहा कि अमित शाह देश के गृह मंत्री हैं। उनके चेहरे में सरदार पटेल का चेहरा देखता हूं।


via WORLD NEWS