उपराष्ट्रपति धनखड़ ने कहा कि हमें इस बात को ध्यान में रखने की आवश्यकता है कि लोकतांत्रिक शासन में किसी भी बुनियादी ढांचे की बुनियाद संसद में होने वाले जनादेश की प्रमुखता को कायम रखना है। उन्होंने कहा कि यह चिंताजनक बात है कि इस बहुत ही महत्वपूर्ण मुद्दे पर जो लोकतांत्रिक ताने-बाने के लिए है, संसद का ध्यान केंद्रित नहीं है।
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