Saturday, March 5, 2022

मीडिया पर कई प्रकार से हो रहे हमले, पत्रकारों को इसकी रक्षा के लिए खड़ा होना चाहिए: न्यायमूर्ति लोकुर

नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट के पूर्व न्यायाधीश न्यायमूर्ति मदन बी लोकुर (Former SC Judge Justice ) ने शनिवार को कहा कि देश में मीडिया पर कई प्रकार से हमला किया जा रहा है। प्रेस की स्वतंत्रता () संविधान की ओर से मिला एक मौलिक अधिकार है और पत्रकारों को इसकी रक्षा के लिए खड़ा होना चाहिए। पत्रकारिता के लिए आईपीआई-इंडिया पुरस्कार प्रदान करने के वास्ते आयोजित के कार्यक्रम को संबोधित करते हुए न्यायमूर्ति लोकुर ने कहा कि पत्रकारों के विरुद्ध प्राथमिकी दर्ज करने और गिरफ्तार करने समेत कई घटनाओं से मीडियाकर्मियों पर हतोत्साहित करने वाला प्रभाव पड़ता है। जिसके चलते वे जरूरत से ज्यादा सावधान होकर काम करने लगते हैं। उन्होंने कहा यह सामान्य ज्ञान का मामला है कि प्रेस पर कई तरह के हमले होते हैं। कई पत्रकारों को गिरफ्तार किया गया और उन्हें उनका काम करने के लिए लंबे समय तक जेल में रखा गया। कई पत्रकारों के विरुद्ध इसी कारण से प्राथमिकी दर्ज की गई। ऐसे भी मामले सामने आए हैं जब कुछ पत्रकारों को शालीनता से बात मानने पर मजबूर किया गया। न्यायमूर्ति लोकुर ने कहा कि ऐसी घटनाएं सामने आईं जब मीडिया संगठनों को विज्ञापन नहीं दिए गए या विज्ञापन का भुगतान नहीं किया गया जिससे छोटे अखबार तबाह हो गए। उन्होंने मलयालम समाचार चैनल मीडियावन का परोक्ष रूप से उदाहरण देते हुए कहा अब एक नया मामला सामने आया है। एक टीवी चैनल के लाइसेंस का नवीकरण राष्ट्रीय सुरक्षा का हवाला देते हुए नहीं किया गया। इस मामले में किसी कारण का खुलासा नहीं किया गया।

कब और कैसे खत्‍म होगी रूस-यूक्रेन के बीच जंग, क्‍या हो सकता है भारत का रोल?

Russia-Ukraine Conflict: यूक्रेन पर रूस के हमले () का शनिवार को दसवां दिन था। अब तक सुलह (Russia-Ukraine Reconciliation) का रास्‍ता नहीं दिख रहा है। रूस को (Russia-Ukraine War) रोकने की कोशिशें जारी हैं। इसके लिए पश्चिमी देशों ने प्रतिबंधों (Sanctions on Russia) का भी सहारा लिया है। यह और बात है कि रूस अपने स्‍टैंड से टस से मस नहीं हुआ है। वहीं, यूक्रेन किसी भी कीमत पर हथियार रखने को तैयार नहीं है। वह आखिरी समय तक लड़ने का ऐलान कर चुका है। ऐसे में सवाल यह उठता है कि आखिर यह जंग () खत्‍म कैसे होगी? क्‍या इसे खत्‍म करने में भारत की भी कोई भूमिका हो सकती है? आइए, यहां समझने की कोशिश करते हैं कि कैसे इस युद्ध पर विराम लग सकता है। रूस को कर दिया जाए मजबूर रूस को पश्चिमी देशों ने अलग-थलग करने की कवायद शुरू कर दी है। उस पर कई तरह के आर्थिक प्रतिबंध लगाए गए हैं। यूक्रेन पर हमले के लिए संयुक्‍त राष्‍ट्र के अलग-अलग निकायों में भी रूस के खिलाफ प्रस्‍ताव लाए गए हैं। इनका मकसद रूस को जंग रोकने के लिए मजबूर कर देना है। इस कड़ी में आगे और कदम उठाए जाने पर रूस पर लगातार दबाव बढ़ेगा। उसके लिए दुनिया से व्‍यापार करना मुश्किल होगा। रूस एक बड़ी अर्थव्‍यवस्‍था है। वह किसी भी हालत में सब कुछ दांव पर लगाकर अनिश्चितकाल तक युद्ध को जारी नहीं रख सकता है। यूक्रेन रूसी हमले के आगे टिका रहे हाल में हम देख चुके हैं कि किस तरह अफगानिस्‍तानी फौजों ने तालिबान के आगे कुछ ही दिनों में घुटने टेक दिए थे। इसने तालिबान को अफगान‍िस्‍तान पर कब्‍जा करने का मौका दिया। वह एक-एक कर तमाम इलाकों को अपने काबू में लेता चला गया। यूक्रेन के संबंध में भी यही बात लागू होगी। यहां उसके सैनिकों के धैर्य की अग्निपरीक्षा है। अब तक उसने रूसी हमले से लोहा लिया है। यूक्रेन ने राजधानी कीव पर कब्‍जा करने की रूसी सैनिकों की कोशिशों को नाकाम किया है। खारकीव और मारियुपोल जैसे प्रमुख शहरों पर भी उसका नियंत्रण बना हुआ है। युद्ध लंबे समय तक चलेगा तो इससे रूसी सेना का मनोबल टूटेगा। ऐसे में यूक्रेन के लिए रूसी सेना के सामने जमे रहना जरूरी है। देर सवेर यह युद्ध रुकने का कारण बन सकता है। धन-बल दोनों से कमजोर हो रूस प्रतिबंधों के रूप में पश्चिमी देशों का शिकंजा बढ़ने के साथ यूक्रेन का संयम रूस को धन-बल दोनों से कमजोर करेगा। दुनिया के ज्‍यादातर देशों को यूक्रेन का समर्थन प्राप्‍त है। यह भी उसे अपने से कई गुना ताकतवर रूस के सामने खड़े होने की ताकत देगा। अर्थव्‍यवस्‍था को डगमगाता देख व्‍लादिमीर पुतिन गुणा-गणित बदल सकते हैं। घरेलू स्‍तर पर रूस पर बढ़े दबाव पुतिन के सामने रूस के अंदर ही किसी तरह के विरोध को थामने की चुनौती होगी। छोटे-मोटे प्रदर्शनों की खबरें वहां से आई हैं। इनमें लोगों ने हमले का विरोध किया है। कई की गिरफ्तारी भी हुई है। अंदरूनी दबाव बढ़ा तो इसकी आंच सत्‍ता तक पहुंचेगी। रूस अपने मंसूबों में सफल हो रूस अगर अपनी सैन्‍य ताकत से यूक्रेन को घुटने टेकने पर मजबूर कर दे तो भी युद्ध रुक जाएगा। हथियारों और सैन्‍य सजो-सामान से रूस यूक्रेन से कई गुना ज्‍यादा ताकतवर है। रूस की कीव पर कब्‍जा करने की कोशिशें जारी हैं। भारत की भूमिका भारत और चीन एशिया की दो प्रमुख महाशक्तियां हैं। यूक्रेन पर रूस के हमले को लेकर अब तक इनका रुख न्‍यूट्रल रहा है। भारत ने तो खासतौर से इस मामले में अपने सामने लक्ष्‍मण रेखा खींच रखी है। युद्ध की शुरुआत से ही वह यूक्रेन और रूस दोनों के संपर्क में रहा है। यहां तक उसने युद्ध को रोकने में अपनी ओर से किसी सार्थक भूमिका की पेशकश की है। भले भारत का यह रुख पश्चिमी देशों का अखरा है। लेकिन, भारत का यही रुख पुतिन के साथ किसी सार्थक बातचीत का पुल बन सकता है। भारत के साथ मिलकर चीन भी युद्ध को रोकने में बड़ा किरदार अदा कर सकता है।

'फुल करा लें टंकी, खत्‍म हो रहा मोदी सरकार का चुनावी ऑफर...' पेट्रोल-डीजल के दाम बढ़ने की आशंका के बीच राहुल गांधी का तंज

Rahul Gandhi Attacks Modi Govt: पेट्रोल-डीजल के दाम (Petrol-Diesel Price) बढ़ने की आशंका के बीच कांग्रेस के पूर्व अध्‍यक्ष राहुल गांधी (Rahul Gandhi) ने मोदी सरकार पर तीखा तंज किया है। उन्‍होंने एक ट्वीट कर लोगों को अपनी गाड़ी की टंकी फटाफट फुल करा लेने की सलाह दी है। राहुल ने पांच राज्‍यों में चुनाव (Elections in 5 States) के बाद पेट्रोल-डीजल के मूल्‍य बढ़ने की ओर इशारा (Rahul Hints Petrol Price increase) किया है। उन्‍होंने कहा है कि मोदी सरकार का 'चुनावी' ऑफर खत्‍म होने वाला है। कांग्रेस नेता ने यह ट्वीट पांच राज्‍यों में चुनाव के बाद पेट्रोल-डीजल की कीमतें बढ़ने की आशंका जताने वाली खबरों के बीच किया है। राहुल गांधी ने शनिवार को ट्वीट कर लिखा, 'फटाफट पेट्रोल टैंक फुल करवा लीजिए। मोदी सरकार का 'चुनावी' ऑफर खत्‍म होने जा रहा है।' यूपी सहित पांच राज्‍यों में चुनाव के मद्देनजर बीते चार महीने से पेट्रोल-डीजल के दाम नहीं बढ़े हैं। वहीं, अंतरराष्‍ट्रीय बाजार में कच्‍चे तेल (क्रूड) की कीमतों में लगातार तेजी आ रही है। गुरुवार को इंटरनेशनल मार्केट में गुरुवार को क्रूड के दाम 120 डॉलर प्रति बैरल के पार चली गई थीं। यह 9 साल में सर्वाधिक स्‍तर है। वैसे शुक्रवार को दाम थोड़ा घटकर 111 डॉलर प्रति बैरल हो गए थे। इसके बावजूद भी तेल की लागत और खुदरा बिक्री दरों के बीच का अंतर बढ़ता जा रहा है। खुदरा ईंधन विक्रेताओं (ऑयल मार्केट‍िंंग कंपनियों) को लागत वसूली के लिए पेट्रोल और डीजल के दाम 16 मार्च तक 12 रुपये प्रति लीटर से भी ज्‍यादा बढ़ाने की जरूरत है। कांग्रेस नेताओं का दावा है कि चुनाव खत्‍म होने के बाद पेट्रोल-डीजल के दामों में बढ़ोतरी होगी। आईसीआईसीआई सिक्योरिटीज ने एक रिपोर्ट में कहा था कि बीते दो महीनों में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर क्रूड के दाम बढ़ने से सरकारी स्वामित्व वाली ऑयल मार्केटिंग कंपनियों को लागत वसूली के लिए 16 मार्च 2022 या उससे पहले ईंधन की कीमतों में 12.1 रुपये प्रति लीटर की बढ़ोतरी करनी होगी। तेल कंपनियों के मार्जिन को भी जोड़ लें, तो 15.1 रुपये प्रति लीटर की मूल्यवृद्धि करने की जरूरत होगी। क्रूड की कीमत में उछाल को रूस-यूक्रेन युद्ध से जोड़कर देखा जा रहा है।

यूक्रेन से छतरपुर लौटा छतरपुर का निशांत, बताया देरी की वजह क्यों बना एयर इंडिया


एमपी के छतरपुर का निशांत (Nishant Returns from Ukraine) शनिवार को यूक्रेन से अपने घर लौट आया। ऑपरेशन गंगा के तहत उसे रोमानिया से भारत लाया गया। सुरक्षित वापसी के लिए भारत और रोमानिया की सरकारों का धन्यवाद देने के साथ निशांत ने यह भी कहा कि शुरुआत में एयर इंडिया के फ्लाइट की टिकट में कई गुना इजाफा नहीं हुआ होता तो वे पहले ही भारत आ गए होते।

निशांत को रोमानिया बॉर्डर पहुंचने के लिए कहा गया था। उसने अन्य छात्रों के साथ मिलकर चार बस बुक किए। उससे वे रोमानिया बॉर्डर के पास पहुंचे। बॉर्डर के नजदीक ट्रैफिक ज्यादा होने के चलते बस ने उन्हें 15 किलोमीटर दूर ही छोड़ दिया। वहां से सभी छात्र पैदल चलकर बॉर्डर पहुंचेबॉर्डर पर उन्हें शेल्टर होम में रखा गया और अपनी बारी का इंतजार करने को कहा गया। वहां पहले से ही हजारों छात्र जमा थे।

शेल्टर होम में रोमानिया सरकार ने उनके खाने-पीने का पूरा ध्यान रखा, लेकिन उन्हें यहां तीन दिन तक रुकना पड़ा। समय गुजरने के साथ चिंता बढ़ी तो निशांत अपने दोस्तों के साथ टैक्सी कर खुद ही एयरपोर्ट पहुंच गया। एयरपोर्ट पर केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया पहले से ही मौजूद थे। निशांत ने उनसे मिलकर अपनी हालत बताई तो सिंधिया ने सुरक्षित भारत पहुंचने का भरोसा दिलाया। इसके कुछ घंटे बाद उसे भारत आ रहे विमान में जगह मिल गई और वह दिल्ली के रास्ते छतरपुर पहुंच गया। #russiaukraine, #russiaukrainewar,


via WORLD NEWS