Thursday, November 25, 2021

कभी नहीं मिटेगा बंटवारे का दर्द, विभाजन निरस्त करना ही समाधान... भागवत बोले

नोएडा RSS चीफ मोहन भागवत (Mohan Bhagwat) ने देश के बंटवारे का मुद्दा उठाया। गुरुवार को भाऊराव देवरस सरस्वती विद्या मन्दिर में आयोजित पुस्तक विमोचन कार्यक्रम को सम्बोधित करते हुए राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचलाक डॉ. मोहनराव भागवत ने कहा कि मातृभूमि का विभाजन न मिटने वाली वेदना है और यह वेदना तभी मिटेगी जब विभाजन निरस्त होगा। डॉ. भागवत ने कृष्णानन्द सागर की पुस्तक ‘विभाजनकालीन भारत के साक्षी’ का विमोचन किया। गलतियों से दुखी होने की नहीं, सबक लेना जरूरी पुस्तक के बारे में बताते हुए डॉ. मोहन भागवत ने कहा इतिहास सभी को जानना चाहिए। उन्होंने कहा 'पूर्व में हुईं गलतियों से दुखी होने की नहीं अपितु सबक लेने की आवश्यकता है। गलतियों को छिपाने से उनसे मुक्ति नहीं मिलेगी। 'विभाजन का उपाय, उपाय नहीं था। विभाजन से न तो भारत सुखी है और न वे सुखी हैं जिन्होंने इस्लाम के नाम पर विभाजन किया।' 'जब भारत पर इस्लाम का आक्रमण हुआ...' विभाजन पर बोलते हुए भागवत ने कहा कि इसे तब से समझना होगा जब भारत पर इस्लाम का आक्रमण हुआ और गुरु नानक देव जी ने सावधान करते हुए कहा था – यह आक्रमण देश और समाज पर हैं किसी एक पूजा पद्धति पर नहीं। उन्होंने कहा कि “इस्लाम की तरह निराकार की पूजा भारत में भी होती थी किन्तु उसको भी नहीं छोड़ा गया क्योंकि इसका पूजा से सम्बन्ध नहीं था अपितु प्रवत्ति से था और प्रवत्ति यह थी कि हम ही सही हैं, बाकी सब गलत हैं और जिनको रहन है उन्हें हमारे जैसा होना पड़ेगा या वे हमारी दया पर ही जीवित रहेंगे। इस प्रवत्ति का लगातार आक्रमण चला और हर बार मुंह की कहानी पड़ी।” देखिए बंटवारे पर भागवत का पूरा बयान- धर्म पूजा से सम्बन्ध काम रखता है- मोहन भागवत भागवत ने कहा कि हमारा संविधान और हमारी परम्परा के अनुसार राज्य किसी पूजा (पद्दती) का नहीं होता, राज्य धर्म का होता है और वह धर्म पूजा से सम्बन्ध काम रखता है, वह धर्म सबको जोड़ने और सबकी उन्नति के लिए आवश्यक कार्य पर बल देता है डॉ भागवत ने देश की स्वतन्त्रता को लेकर संघ के संस्थापक डॉ. हेडगेवार की दूरदर्शिता के विषय में बताते हुए कहा कि वर्ष 1930 में डॉ. हेडगेवार ने सावधान करते हुए हिन्दू समाज को संगठित होने को कहा था। 'लेकिन हमारे नेता मैदान छोड़कर भाग गए' डॉ भागवत ने कहा 'भीष्मपितामह ने कहा था कि विभाजन कोई समाधान नहीं है, जबकि श्रीकृष्ण ने अर्जुन को समझाते हुए कहा कि रणछोड़ कर मत भागो। परन्तु हमारे नेता मैदान छोड़कर भाग गए। मुट्ठी भर लोगों को सन्तुष्ट करने के लिए हमने कई समझौते किए। राष्ट्रगान से कुछ पंक्तियां हटाईं, राष्ट्रीय ध्वज के रंगों में परिवर्तन किया, परन्तु वे मुट्ठीभर लोग फिर भी सन्तुष्ट नहीं हैं। 'हमारे नेताओं ने पाकिस्तान की मांग ठुकरा दी होती तो क्या होता?' डॉ भागवत ने प्रश्न उठाया कि यदि हमारे नेताओं ने पाकिस्तान की मांग ठुकरा दी होती तो क्या होता? वह बोले – 'कुछ नहीं होता, परन्तु तब के नेताओं को स्वयं पर विश्वास नहीं था। वे झुकते ही गए।' कार्यक्रम के विशिष्ट अतिथि विद्या भारती अखिल भारतीय शिक्षा संस्थान के महामन्त्री श्रीराम आरावकर और भारतीय इतिहास अनुसंधान परिषद के सदस्य सचिव कुमार रत्नम रहे तथा अध्यता पूर्व न्यायाधीश शम्भूनाथ श्रीवास्तव ने की।

क्या घटेगी आबादी, जानें क्या है NFHS-5 की रिपोर्ट के मायने

नैशनल फैमिली हेल्थ सर्वे (एनएफएचएस-5) की ताजा रिपोर्ट ने यह महत्वपूर्ण तथ्य उजागर किया है कि भारत में टोटल फर्टिलिटी रेट यानी राष्ट्रीय प्रजनन दर 2.2 से कम होकर 2.0 तक पहुंच गई है। प्रति महिला औसत प्रजनन दर 2.1 को रिप्लेसमेंट मार्क के रूप में जाना जाता है। यानी इस औसत पर जनसंख्या कमोबेश स्थिर रहती है। यह पहली बार हुआ है कि देश की राष्ट्रीय प्रजनन दर रिप्लेसमेंट मार्क से भी नीचे चली गई। ध्यान रहे, ऐसा संयोगवश या किसी नाटकीय घटनाक्रम के तहत नहीं हुआ है। औसत प्रजनन दर में कमी की प्रवृत्ति काफी समय से दिख रही थी। ऐसे में यह मानना गलत नहीं होगा कि क्रमिक रूप से आया यह बदलाव काफी हद तक टिकाऊ है। निकट भविष्य में इसके अचानक फिर ऊपर का रुख ले लेने जैसे कोई आसार नहीं हैं। इसका मतलब यह हुआ कि को लेकर अपने नजरिये में भी हमें बदलाव लाने की जरूरत है। आजादी के बाद से ही जनसंख्या बढ़ोतरी को एक समस्या के रूप में देखने के हम आदी रहे हैं। आपातकाल के दौरान तो जबरन नसबंदी जैसे कार्यक्रम भी सरकार की ओर से चलाए गए। तत्कालीन सरकार की उस वजह से हुई बदनामी के चलते बाद की सरकारों ने वैसा कोई सख्त कार्यक्रम दोबारा नहीं शुरू किया, लेकिन अलग-अलग स्तर पर जनसंख्या वृद्धि पर अंकुश लगाने की कोशिशें चलती रहीं। मौजूदा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जरूर ‘जनसंख्या विस्फोट’ की जगह डेमोग्राफिक डिविडेंड का विमर्श चलाकर यह समझाने का प्रयास किया कि जनसंख्या हमारी समस्या नहीं है। इसका उपयुक्त इस्तेमाल हो तो यह हमारे लिए सबसे बड़ा वरदान साबित हो सकती है। मगर इस विमर्श का जमीन पर कोई खास असर नहीं देखा जा सका है। कुछ हिंदुत्ववादी संगठन आज भी जनसंख्या वृद्धि को देश की एक बड़ी समस्या के रूप में देखते हैं और इसके लिए उन समुदायों को दोषी ठहराते हैं जिनमें जन्मदर अपेक्षाकृत ज्यादा है। इतना ही नहीं, बीजेपी शासित कुछ राज्यों ने हाल में भी जनसंख्या वृद्धि पर अंकुश लगाने के लिए कड़े कानून लाने की बात कही है। यूपी, असम, कर्नाटक, गुजरात आदि राज्यों में खुद मुख्यमंत्री या कैबिनेट सदस्य ऐसा कानून लाने का इरादा जता चुके हैं। बीजेपी सांसद राकेश सिन्हा और अनिल अग्रवाल संसद में भी ऐसे एक निजी विधेयक का नोटिस दे चुके हैं। यह समझा जाना जरूरी है कि जनसंख्या को लेकर ऐसा विमर्श अब न केवल पुराना पड़ चुका है बल्कि बदले हालात में इससे प्रेरित कदम हानिकारक साबित होंगे। ताजा प्रवृत्ति जारी रही तो कुछ ही समय में हमारी आबादी घटने लगेगी और चुनौतियों का स्वरूप बिल्कुल बदल जाएगा। इसलिए जरूरी है कि लकीर का फकीर बन पुराना राग अलापते रहने के बजाय हम खुद को आने वाली नई चुनौतियों के लिए तैयार करें।

राजस्थान में कांग्रेस सरकार ने कैबिनेट बदली, क्या पार्टी के लिए भी कुछ बदला

मंत्रिमंडल विस्तार से गहलोत और पायलट, दोनों ही खेमे प्रसन्न हैं। एक और बदलाव हुआ है। जहां आजादी के बाद कांग्रेस के शुरुआती चार मंत्रिमंडलों में एक भी एससी-एसटी या महिला प्रतिनिधि नहीं था, वहीं इस बार पांच एसटी, चार एससी और तीन महिला मंत्री हैं।

简报:丑闻旋涡中的张高丽;南非发现新冠病毒新变种


World New York TimesBy BY EMILY CHAN AND KONEY BAI Via NYT To WORLD NEWS

Touring Climate Threats at the Museum


Climate New York TimesBy Unknown Author Via NYT To WORLD NEWS

Russian Mine Blast Kills Dozens, Among Them Rescuers


World New York TimesBy BY IVAN NECHEPURENKO Via NYT To WORLD NEWS

Abuses Under Gambia’s Ex-Ruler Should Be Prosecuted, Inquiry Says


World New York TimesBy BY SAIKOU JAMMEH AND RUTH MACLEAN Via NYT To WORLD NEWS

A Parade Returns to a City Thankful for Normal


New York New York TimesBy BY SARAH MASLIN NIR Via NYT To WORLD NEWS

Undeterred by Channel’s Perils, Desperate Migrants Still Plan to Cross


World New York TimesBy BY CONSTANT MÉHEUT AND NORIMITSU ONISHI Via NYT To WORLD NEWS

Your Friday Briefing


Briefing New York TimesBy BY AMELIA NIERENBERG Via NYT To WORLD NEWS

Will Germany’s ‘Debt Brake’ Stop Its Green Ambitions?


World New York TimesBy BY KATRIN BENNHOLD AND MELISSA EDDY Via NYT To WORLD NEWS

Saving History With Sandbags: Climate Change Threatens the Smithsonian


Climate New York TimesBy BY CHRISTOPHER FLAVELLE Via NYT To WORLD NEWS

A native New Yorker wrangles a balloon in the Thanksgiving parade.


World New York TimesBy BY GEORGE GENE GUSTINES Via NYT To WORLD NEWS

‘Licorice Pizza’ Review: California Dreaming and Scheming


Movies New York TimesBy BY MANOHLA DARGIS Via NYT To WORLD NEWS

With ‘Encanto,’ Stephanie Beatriz Finds Yet Another Voice


Movies New York TimesBy BY CARLOS AGUILAR Via NYT To WORLD NEWS

किसान आंदोलन के एक साल पूरा होने पर दिल्ली कूच, पुलिस ने शाम में लगाए बैरिकेड

नई दिल्ली 26 नवंबर को किसान आंदोलन का एक साल पूरा हो जाएगा और शुक्रवार इस मौके पर दिल्ली की सीमाओं पर किसान एकजुट होंगे। हरियाणा, पंजाब और पश्चिमी यूपी से किसान दिल्ली बॉर्डर पर जुटने लगे हैं। वहीं इसको देखते हुए दिल्ली पुलिस की ओर से गाजीपुर बॉर्डर पर दोबारा से बैरिकेडिंग की गई है और जवानों की तैनाती भी बढ़ा दी गई है। सरकार की ओर से तीन कृषि कानूनों को वापस लेने के बाद किसान एमएसपी पर गारंटी चाहते हैं। नए कृषि कानूनों के खिलाफ पिछले एक साल से आंदोलन कर रहे किसानों ने साफ कर दिया है कि अभी वे बॉर्डर से हटने वाले नहीं हैं। उन्होंने साफ कर दिया है कि 29 नवंबर से शुरू होने जा रहे संसद के शीतकालीन सत्र के दौरान वे अपने पहले से तय कार्यक्रम के अनुसार ही विरोध प्रदर्शन जारी रखेंगे। किसान नेता राकेश टिकैत ने गुरुवार कहा कि हम पीएम मोदी से अपील करना चाहते हैं कि एमएसपी हमेशा से हमारा मुद्दा रहा है। ऐसे में हमारा दिल्ली बॉर्डर छोड़ने का कोई इरादा नहीं है। भारतीय किसान यूनियन के प्रवक्ता राकेश टिकैत ने कहा कि 27 नवंबर को बैठक होगी और हम आगे की योजना बनाएंगे। 29 नवंबर को दिल्ली में ट्रैक्टर मार्च का आयोजन होगा। टिकैत ने कहा हम पीछे हटने वाले नहीं है और सरकार को गारंटी देनी ही होगी। किसान संगठन इस बात पर अड़े हुए हैं कि संसद के शीतकालीन सत्र के दौरान रोज 500 किसान ट्रैक्टर ट्रॉली पर सवार होकर संसद तक मार्च करेंगे और अपना विरोध जताएंगे। किसान आंदोलन के एक साल पूरे होने और किसानों के बॉर्डर पर जुटने को लेकर दिल्ली पुलिस हाई अलर्ट पर है। पुलिस के आला अधिकारियों और किसान संगठनों के नेताओं के बीच बैठकों का सिलसिला शुरू हो चुका है, लेकिन अभी बातचीत किसी नतीजे पर नहीं पहुंची है। दिल्ली पुलिस के अधिकारियों का कहना है कि किसी को भी कानून व्यवस्था को तोड़ने की इजाजत नहीं दे सकते, लेकिन अगर कोई लोकतांत्रिक तरीके से विरोध प्रदर्शन करके अपनी बात रखना चाहता है, तो उसे रोकेंगे भी नहीं।

संविधान दिवस कार्यक्रम का बहिष्कार करेगी कांग्रेस, दूसरे दल भी आ सकते हैं साथ

नई दिल्ली कांग्रेस ने संसद के केंद्रीय कक्ष में शुक्रवार को संविधान दिवस पर आयोजित होने वाले कार्यक्रम में भाग नहीं लेने का फैसला किया है। उसका आरोप है कि नरेंद्र मोदी सरकार संविधान पर निरंतर हमले कर रही है और संवैधानिक संस्थाओं को कमजोर कर रही है। सूत्रों के मुताबिक, कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी की अध्यक्षता में हुई पार्टी के संसदीय मामलों के रणनीतिक समूह की बैठक में यह फैसला लिया गया। पिछले साल भी कांग्रेस ने इस कार्यक्रम का बहिष्कार किया था। पार्टी के एक वरिष्ठ नेता ने कहा जब सरकार संविधान पर निरंतर हमले कर रही है और संवैधानिक संस्थाओं को कमजोर कर रही है तो फिर ऐसे कार्यक्रम का दिखावा क्या करना है। हम संविधान पर हमले करने वाली सरकार के ऐसे कार्यक्रम में शामिल नहीं हो सकते। सूत्रों के अनुसार कांग्रेस के नेता विपक्षी दलों के नेताओं के संपर्क में हैं। द्रमुक, शिवसेना, आरएसपी, राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी, समाजवादी पार्टी, तृणमूल कांग्रेस, भाकपा, माकपा, राजद, झामुमो, आईयूएमएल और कुछ अन्य दल भी इस कार्यक्रम का बहिष्कार कर सकते हैं। गौरतलब है कि आजादी के अमृत महोत्सव के तहत संसद के केंद्रीय कक्ष में शुक्रवार (26 नवंबर) को संविधान दिवस पर एक कार्यक्रम का आयोजन होगा जिसे राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद, उपराष्ट्रपति एम वेंकैया नायडू और प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी संबोधित करेंगे। संसदीय कार्य मंत्रालय के बयान के अनुसार, राष्ट्रपति अपने संबोधन के बाद संविधान की प्रस्तावना को पढ़ेंगे तथा उनके साथ संविधान की प्रस्तावना को पढ़ने के लिए पूरे देश को आमंत्रित किया गया है।

Dakshin Shakti Exercise:जैसलमेर के धोरों पर सैन्य अभ्यास जारी, सेना का शौर्य देखने पहुंचे सेना प्रमुख


जैसलमेर/जयपुर। राजस्थान में जैलसमेर के रेतिले धोरों पर भारतीय सेना (indian army) के सैन्य अभ्यास में गुरुवार को जवानों का अदम्य साहस देखने को मिला। इस सबसे बड़े सैन्‍य अभ्‍यास के दौरान सेना प्रमुख जनरल एमएम नरवणे भी मौजूद रहे।

बता दें कि सेना के इस दक्षिण शक्ति सैन्य अभ्यास में कोस्‍टगार्ड और बीएसएफ से 30 हजार सैनिक हिस्‍सा ले रहे हैं। जैसलमेर में चल रहे इस सालाना अभ्‍यास का शुक्रवार को अंतिम दिन है। इस दिन सीडीएस जनरल बिपिन रावत और सेना प्रमुख जनरल एमएम नरवणे समेत तमाम सैन्‍य अधिकारियों के मौजूद रहने वाले हैं। शुक्रवार को इस सैन्य अभ्यास में करीब 400 पैरा ट्रूपर्स का एक साथ पैराजंप देखने को मिलने वाला है।
5 दिसंबर को जयपुर आएंगे अमित शाह, भाजपा प्रदेश कार्यसमिति बैठक में होंगे शामिल


via WORLD NEWS